मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के घोषणा के बाद भी लगवैली की सूमा में सब्जी मंडी नहीं खुल पाई है। चार साल बाद भी सब्जी मंडी के न बनने से घाटी के सब्जी उत्पादक ढालपुर में फुटपात पर सब्जी बेचने को मजबूर हो गए है। जबकि बागवानों को अपना उत्पाद सेब, पलम, नाशपाती व अन्य साग सब्जियों को भुंतर ले जाना पड़ रहा है।
कोरी घोषणा से घाटी के एक दर्जन से अधिक पंचायतों में सरकार के प्रति भारी रोष है। हालांकि सब्जी मंडी खोलने को लेकर एपीएमसी कुल्लू ने कई बार मौके का दौरा कर निरीक्षण भी किया, लेकिन चिन्हित की गई जगह इसके लिए उपयुक्त नहीं बैठ रही है। ऐसे में लगवैली के सूमा में सब्जी मंडी का निर्माण सिरे नहीं चढ़ पा रहा है।
सब्जी मंडी न खुलने से लगवैली की एक दर्जन से अधिक पंचायतों के सैकड़ों किसान-बागवान सूमा में सब्जी मंडी खुलने के इंतजार में है। जिला मुख्यालय के साथ सटी लगवैली के सब्जी उत्पादक महिलाएं ढालपुर चौक स्थित फुटपाथ में सब्जियां बेचने को विवश है। वहीं घाटी के बागवान अपना उत्पाद 30 से 40 किलोमीटर दूर भुंतर सब्जी मंडी को ले जाना पड़ता है।
सब्जी उत्पादक शेतू देवी, हीरा देवी, निर्मला, माघी देवी, बिमला, कमला, खेम चंद, हिम्मत राम तथा दलीप चंद ने कहा कि बिना सुविधाओं के वह अपनी साग-सब्जी को ढालपुर में बेचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा अगर सूमा में सब्जी मंडी का निर्माण होता है तो उन्हें भी रोजाना के ठोंकरे खाने से राहत मिलेगी।
किराये में ही खत्म हो आधी कमाई
बागवान खीमू राम, आलम चंद, दुनी चंद, जय सिंह, टिकम राम, सरेश तथा जीवन दास का कहना है कि घाटी के लोगों की आधी कमाई अपने उत्पाद को मंडियों तक पहुंचाने में किराये में ही खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि लगवैली के सैकड़ों किसान-बागवानों की सुविधा को देखते हुए सूमा में सब्जी मंडी का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
बागवानों को उठाना पड़ नुकसान : महेश्वर सिंह
सदर विधायक महेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 2013 को अपने कुल्लू दौरे के दौरान लगवैली के सूमा में सब्जी मंडी खोलने की बात कही थी, लेकिन चार साल बाद भी सब्जी मंडी नहीं बन पाई है। जिससे लगवैली के किसान-बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जगह नहीं उपयुक्त : यूपेंद्र कांत
एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति के अध्यक्ष यूपेंद्र कांत मिश्रा ने कहा कि सूमा में सब्जी मंडी खोलने के लिए जो जगह चिन्हित की गई वह उपयुक्त नहीं है। एपीएमसी ने इसका निरीक्षण किया है और इसे बाढ़ ग्रस्त घोषित किया गया।