उस समय उनकी आयु 50 साल थी। महाराजा ने डॉ. पियरसाल को पूरे सैनिक सम्मान के साथ नाहन के ऐतिहासिक विला राउंड में दफन किया। हिमाचल के पूर्व विस अध्यक्ष टीएस नेगी की सिरमौर गेजेटियर, कंवर रणजोर सिंह की तारीख-ए-रियासत सिरमौर... पुस्तक में भी इस प्रेम कहानी का जिक्र है।
भाषा विभाग ने कुछ साल पहले ही इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद किया है। हिस्ट्री ऑफ सिरमौर में भी डॉ. पियरसाल का जिक्र है। इतिहास के पन्ने बताते हैं कि जब उनका निधन हुआ, उस समय लेडी लूसिया 49 साल की थीं। 1885 में लूसिया ने भारी धन खर्च कर अपने पति की कब्र को पक्का करवाया और इंग्लैंड न लौटकर यहां रही। चाहतीं थीं कि जब उन्हें मौत आए तो वे पति की कब्र के साथ दफन हों।
इसके लिए लूसिया ने 38 साल मौत का इंतजार किया। 19 अक्तूबर 1921 को आखिरकार वह घड़ी भी आ गई जब लूसिया का इंतजार खत्म हुआ और अपने पति को याद करते हुए दुनिया को अलविदा कह दिया। लूसिया की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए महाराजा ने सम्मान सहित लूसिया को भी उनके पति डॉ. पियरसाल की कब्र की बगल में दफनाया।
राजवंशज एवं पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर ने बताया कि कई पुस्तकों में भी डॉ. इडविन व मैडम लूसिया की प्रेम कहानी का जिक्र है। मैडम लूसिया की इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें पति के बगल में दफनाया जाए। उनकी मृत्यु के बाद बकायदा उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विला राउंड में पति की कब्र के समीप दफनाया गया था।