हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गांवों से हो रहे पलायन पर नाम लिए बगैर कांग्रेस पर निशाना साधा। कहा कि यदि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना आजादी के बाद ही लागू हो जाती तो गांवों से पलायन की समस्या पैदा ही न होती।
आज के दौर में भी ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कई-कई दिन का पैदल सफर सिर्फ इसलिए किया, ताकि वे अपने स्कूलों-हास्टलों तक जा सकें। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के दो प्रयासों चीड़ पत्ती नीति और ग्रोथ सेंटर का उदाहरण दिया और कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएंगे तो लोग अपनी मूल संस्कृति और जगह को नहीं छोड़ेंगे।
उन्होंने किसानों के उत्पादों के उचित दाम को लेकर भी जोर दिया। कहा कि अगर किसानों को उनके उत्पादों का उचित दाम मिले तो वे उत्पादन करते रहेंगे। गुलाब का तेल, चोलई और कुट्टू का उदाहरण देते हुए रावत ने कहा कि हिमालयी राज्यों में ऐसे उत्पाद होते हैं, जो देश-दुनिया में कही नहीं मिलते।
ये उत्पाद न सिर्फ स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि उनकी पौष्टिकता ही उनकी मांग बढ़ाती है। ऐसे में सरकारों को इन हिमालयी उत्पादों की सही मार्केटिंग पैकेजिंग करने की जरूरत है।