उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में होगा तकनीक का इस्तेमाल, अंकों की गड़बड़ी रोकने पर जोर
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दो स्तरों पर की जाएगी अब अंकों की पड़ताल
मूल्यांकन प्रक्रिया में त्रुटियों की आशंका होगी कम संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला की स्नातक (यूजी) परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और अंकों के सत्यापन के लिए दोहरी डिजिटल जांच व्यवस्था अपनाई जाएगी। इसके तहत मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रिया में दो स्तरों पर डिजिटल जांच होगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में अंकों से जुड़ी गड़बड़ियों को रोकना और मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं सटीक बनाना है।
विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर की परीक्षाओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच से लेकर अंकों को रिकॉर्ड करने और परीक्षा परिणाम तैयार करने तक कई स्तरों पर काम करना पड़ता है। इस दौरान मानवीय स्तर पर होने वाली छोटी-सी गलती भी विद्यार्थियों के परिणाम को प्रभावित कर सकती है। दोहरी डिजिटल जांच व्यवस्था से ऐसी त्रुटियों की पहचान कर उन्हें समय रहते सुधारने में मदद मिलेगी। डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था से परीक्षा शाखा के कामकाज को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और विद्यार्थियों के अंकों का रिकॉर्ड संभालने में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। दो स्तरों पर जांच होने से अंकों के सत्यापन की प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ होगी।
परीक्षा नियंत्रक श्याम लाल कौशल ने बताया कि इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता बनाए रखना है। परिणाम घोषित होने के बाद अंकों में गड़बड़ी या मूल्यांकन संबंधी शिकायतों के चलते विद्यार्थियों को पुनर्मूल्यांकन सहित अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।