लोक उपचार, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं का होगा मैदानी अध्ययन
-जनजातीय समुदायों के बीच जाकर जुटाई जाएगी उपचार पद्धतियों की जानकारी
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग में प्रदेश की जनजातीय चिकित्सा पद्धतियों और लोक उपचार पर विस्तृत शोध किया जाएगा। विश्वविद्यालय को हिमाचल प्रदेश के स्वदेशी समुदायों में प्रचलित पारंपरिक चिकित्सा और लोक उपचार पद्धतियां परियोजना मिली है। इसके तहत प्रदेश के जनजातीय समुदायों में पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, लोक उपचार पद्धतियों और उनसे जुड़े सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं का मैदानी अध्ययन किया जाएगा। परियोजना को भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से राज्य सरकार के माध्यम से वित्तीय सहायता मिल रही है।
शोध का प्रमुख उद्देश्य जनजातीय समुदायों के बीच मौजूद पारंपरिक उपचार ज्ञान को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करना है। इसके लिए शोधकर्ता समुदायों के बीच जाकर मैदानी सर्वेक्षण करेंगे। स्थानीय लोगों से संवाद के माध्यम से उपचार से जुड़ी पारंपरिक जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें लोक उपचार की विभिन्न पद्धतियों, उनके इस्तेमाल तथा समुदायों में इनके ज्ञान के संरक्षण से जुड़ी जानकारी को दर्ज किया जाएगा। अध्ययन में चिकित्सा ज्ञान को केवल अलग-अलग उपचार पद्धतियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाज, परंपराओं और सामाजिक संरचना को भी शोध का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि लोक उपचार का ज्ञान समुदाय की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से किस तरह जुड़ा हुआ है। शोध के दौरान प्राप्त जानकारी का फील्ड डॉक्यूमेंटेशन और डेटा संकलन किया जाएगा।
पारंपरिक ज्ञान को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने पर जोर
परियोजना में मैदानी कार्य महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। शोध दल समुदायों के सदस्यों के साथ सीधे संवाद कर पारंपरिक उपचार से जुड़ी जानकारी एकत्र करेगा। प्राप्त सूचनाओं को व्यवस्थित रूप से संकलित और दस्तावेजीकृत किया जाएगा। इससे हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में मौजूद लोक चिकित्सा संबंधी ज्ञान का शोध आधारित रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। परियोजना के लिए दो प्रोजेक्ट फेलो नियुक्त किए जाएंगे। पर्यावरण विज्ञान या जीवन विज्ञान में पीएचडी अथवा पीएचडी कर रहे अभ्यर्थियों को इसके लिए पात्र माना गया है। संबंधित क्षेत्र में मैदानी अनुभव तथा हिमाचल के जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाज और सामाजिक संरचना की समझ को प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित फेलो 18 महीने तक परियोजना पर काम करेंगे और उन्हें 27 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। परियोजना के आंकड़ा संकलन, दस्तावेजीकरण और प्रशासनिक काम में सहयोग के लिए दो कार्यालय सहायकों की भी नियुक्ति होगी।