कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शनिवार को सेब पर आयात शुल्क का मामला गूंजा। कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि अफगानिस्तान के रास्ते बाघा बॉर्डर से ईरान का सेब देश में पहुंच रहा है, क्योंकि अफगानिस्तान के सेब पर आयात शुल्क नहीं लगता है। इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। इससे हिमाचल प्रदेश सहित जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब पर भी संकट पैदा हो गया है। यूएसए के सेब पर आयात शुल्क घटाने का मामला उठाते हुए राठौर ने कहा कि इससे हिमाचल के बागवान बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने विपक्ष के नेताओं से भी केंद्र के समक्ष यह मुद्दा उठाने और अवैध ढंग से सेब आयात पर रोक लगाने का आग्रह किया।
साथ ही कहा कि वाशिंगटन एपल पर आयात शुल्क 70 फीसदी ही रहना चाहिए। केंद्र ने जून महीने में ही वाशिंगटन एपल पर शुल्क 70 से घटाकर 50 फीसदी किया। अब इसे 15 फीसदी करने की तैयारी है। इस साल ईरान से बड़ी मात्रा में सेब आयात हो रहा है। इसकी मार आगामी दिनों में कोल्ड स्टोर में रखे जाने वाले सेब पर पड़ेगी। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने 2014 में हमीरपुर में सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का वायदा किया था। केंद्र सरकार ने इस वायदे को पूरा नहीं किया। उल्टा अब आयात शुल्क घटाकर बागवानों को चिंता में डाल दिया है। यूएसए के सेब पर आयात शुल्क 15 फीसदी किया गया तो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का सेब तबाह हो जाएगा।
संयुक्त किसान मंच पदाधिकारी।
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संयुक्त किसान मंच ने सरकार के अगले साल से सेब पैकेजिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के निर्णय का स्वागत किया है। सरकार ने यह निर्णय किसानों-बागवानों के लंबे संघर्ष के बाद लिया है। मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि मंच कई वर्षों से प्रदेश में एपीएमसी एक्ट, लीगल मैट्रोलॉजी एक्ट और पैसेंजर एंड गुड्स टैक्सेशन एक्ट लागू करने के लिए संघर्षरत है। इन कानूनों में प्रदेश की फल और सब्जी मंडियों में सेब और अन्य उत्पाद वजन के हिसाब से बेचने तथा पैकिंग के लिए स्टैंडर्ड पैकेजिंग सामग्री तय करने का प्रावधान है।
बागवानी मंत्री ने इन मांगों को लागू करने के लिए संजीदगी से प्रयास किए। बागवान संगठनों के साथ कई दौरों की बैठकों के बाद सेब को यूनिवर्सल ग्रेडिंग में 24 किलो के कार्टन में वजन के हिसाब से बेचने का फैसला लिया। इस साल सरकार के निर्णय के बावजूद एपीएमसी और मार्केटिंग बोर्ड की सुस्ती के कारण आढ़तियों और खरीदारों की मनमानी और दबाव के कारण मंडियों में सेब वजन और ग्रेडिंग का उल्लंघन देखने को मिला। फसल बेचने के लिए विकल्प न होने के कारण बागवानों को आढ़तियों और लदानियों के हाथों लूटना पड़ा।
सरकार ने एचपीएमसी को मंडियों में सेब खरीदने के लिए उतारने का फैसला तो लिया लेकिन यह व्यवस्था प्रभारी तौर पर लागू नहीं हो पाई। मंच ने सरकार से मांग की कि एचपीएमसी और मार्केटिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली के सुधार कर किसानों व बागवानों को शोषण से बचाने के लिए एपीएमसी एक्ट 2005, एचपी लीगल मैट्रोलॉजी एक्ट, 2009 और एचपी पैसेंजर एंड गुड्स टैक्सेशन एक्ट, 1955 के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।