केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं इंडो तिब्बतियन एसोसिएशन की सह संयोजक मेनका गांधी ने मैकलोडगंज में धर्मगुरु दलाईलामा से मुलाकात की। वे मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में निर्वासित तिब्बत सरकार के 55वें लोकतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचीं थीं।
कार्यक्रम में हिस्सा लेने से पहले मेनका ने धर्मगुरु दलाईलामा से करीब 15 मिनट मंत्रणा की। उन्होंने दलाईलामा की सेहत के बारे में भी जाना। मेनका गांधी ने 55वें लोकतंत्र दिवस समारोह में निर्वासित तिब्बत सरकार के लोकतंत्र की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि तिब्बतियों ने मुश्किल भरे हालात में भी अपनी कला और संस्कृति को संरक्षित करके रखा।
तिब्बतियों के जज्बे की सराहना की
ऐसे कई देश हैं, जिन पर आक्रमण हुए और उसके बाद वे अपनी संस्कृति नहीं बचा पाए। लेकिन, तिब्बतियों के जज्बे से सीख लेने की जरूरत है। मेनका ने कहा कि तिब्बतियों की समस्याओं को कम करने के लिए काम करेंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि भाजपा सांसद शांता कुमार ने भी तिब्बतियों के जज्बे की जमकर सराहना की।
उन्होंने तिब्बतियों को अपनी संस्कृति बचाने रखने के साथ लोकतंत्र दिवस की बधाई दी। समारोह में सांसद रामकुमार कश्यप, सांसद डॉ. थोकचोम मेन्या, सांसद कनक लता, सांसद थुपतेन सेवांग भी उपस्थित रहे।
आंगनबाड़ी केंद्र में पकौडे़ गुलगुले का लुत्फ उठाया
मैकलोडगंज से लौटते वक्त मेनका गांधी ने सकोह आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया। केंद्र में सात बच्चे थे। मेनका ने यहां पतरोड़े, दाल पकौड़े, गुलगुले, कच्ची मक्की का हलवा चखा। बताया जा रहा है कि बुधवार को पोषाहार दिवस पर स्थानीय महिलाएं ये खाना लेकर आई थीं। मेनका ने स्थानीय महिलाओं से बाल विकास सेवाओं से संबंधित समस्याएं और सुझावों के बारे में भी पूछा।
समारोह का हिस्सा नहीं बने धर्मगुरु- मेनका गांधी सहित दुनिया भर से आई कई हस्तियां धर्मगुरु दलाईलामा से उनके निवास स्थान पर मिलीं। चूंकि, धर्मगुरु दलाईलामा 2011 में ही अपनी राजनीतिक शक्तियां त्याग चुके हैं इसलिए वे निर्वासित तिब्बत सरकार के लोकतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा नहीं बने।