इनके तहत केंद्र सरकार द्वारा छात्रों के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को फंडिंग की जाती है। एसएसए, आरएमएसए और ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग बजट आवंटित होता है। तीनों योजनाओं के उद्देश्य एक से हैं।
ऐसे में केंद्र सरकार ने इनका विलय करने का फैसला लिया है। विलय की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए इन दिनों मंथन चल रहा है। जानकार मानते हैं कि विलय होने से बजट का दुरुपयोग कम होगा।
आवंटित बजट के इस्तेमाल में लचीलापन बढ़ेगा। वर्तमान में एक योजना के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल दूसरी योजना के लिए नहीं किया जा सकता है। ऐसे में वे राज्य जिन्होंने प्राथमिक शिक्षा में संतोषजनक प्रगति कर ली है
और बड़े बच्चों पर ध्यान देना चाहते हैं वे बजट का इस्तेमाल उनके लिए कर सकते हैं। इसके अलावा विलय होने से जिला स्तर पर डाइट, माध्यमिक शिक्षा विभाग और प्राथमिक शिक्षा विभाग के बीच तालमेल और समन्वय भी बढ़ेगा।