हिमाचल में इस साल नई सड़कों और पुलों का काम नहीं होगा। केंद्र ने प्रदेश सरकार को नए प्रोजेक्टों की डीपीआर भेजने से मना कर दिया है। सरकार को निर्देश दिए हैं कि पहले पुराने और सालों से लंबित पड़े प्रोजेक्टों के कार्य प्राथमिकता से निपटाए जाएं। इसके पीछे केंद्र ने तर्क दिया है कि देश में कोरोना से निपटने को करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। ऐसे में इस साल सड़कों और पुलों की शेल्फें न भेजी जाएं।
प्रदेश सरकार हर साल विधायकों से विकास कार्यों के लिए 5-6 प्राथमिकताएं लेती है। इसमें प्राथमिकता सड़कों और पुलों की रहती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत इन सड़कों का निर्माण किया जाता है। लोक निर्माण विभाग इनकी डीपीआर तैयार कर केंद्र को प्रस्ताव भेजता है, लेकिन इस साल लोक निर्माण विभाग केंद्र को नए सड़कों और पुलों के प्रोजेक्ट को स्वीकृति को नहीं भेजेगा। विधायकों से लोक निर्माण विभाग को जो प्राथमिकताएं मिली हैं, अगले साल ही इन डीपीआर को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
हिमाचल में 36 हजार किलोमीटर सड़कें
हिमाचल में 36 हजार किलोमीटर सड़कें हैं। इनमें फोरलेन, नेशनल हाइवे, जिला और प्रधानमंत्री ग्राम सड़कें शामिल हैं। सरकार ने 500 और 250 आबादी वाले गांव को सड़क से जोड़ दिया है। अब इससे कम आबादी वाले गांव को सड़क से जोड़ा जा रहा है।
केंद्र सरकार को इस बार सड़कों और पुलों के नए प्रोजेक्ट स्वीकृति को नहीं भेजे जाएंगे। केंद्र के निर्देशों के बाद यह तय किया गया है। कोरोना के चलते यह लिया गया है। सड़कों और पुलों की शेल्फें अगले साल भेजी जाएंगी।
- भुवन शर्मा, इंजीनियर इन चीफ लोनिवि