हिमाचल के बागवानों और किसानों को बजट से खासी उम्मीद है ताकि उनकी आय दोगुना हो सके। प्र्रदेश के किसान और बागवान प्रदेश के अंदर जरूरत के अनुसार कोल्ड स्टोरों और विधायन इकाइयां स्थापित करने की पैरवी करते रहे हैं लेकिन, उनकी यह मांग पिछले कई साल से पूरी नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार किसानों और बागवानों की आय दोगुना करने की बात करती रही है परंतु जब तक फसलों को मंडियों में अच्छा दाम नहीं मिलेगा तब तक आय में वृद्धि कैसे होगी।
प्रदेश के बागवानों की सबसे बड़ी समस्या यही है कि बागवानी और कृषि फसलें तैयार होने के बाद इनके भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं हो पाती। इस कारण किसानों और बागवानों को अपनी फसलें औने पौने दामों पर बेचनी पड़ती है। अगर फसलों के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरों की व्यवस्था हो तो इनके रेट अधिक मिलने पर बेचा जा सकता है। प्रदेश में हर साल करीब 4500 करोड़ का प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सेब कारोबार किया जाता है। सेब बागवानों को हर साल सेब की तैयार फसल तत्काल मंडियों में किसी भी कीमत पर बेचनी पड़ती है। मध्यम और छोटे किसानों को बगीचों के पास कोल्ड स्टोरों की सुविधा नहीं मिलती है।
बागवानों की समस्या यह भी है कि उनके बगीचों के पास फल विधायक इकाइयां भी जरूरत के अनुसार उपलब्ध नहीं है। प्रदेश में हर साल करीब तीस फीसदी फल खराब होते हैं। अगर किसानों को निकट ही फल विधायन की सुविधा मिल जाए तो उनको फसल का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। बागवान और किसान छोटी विधायन इकाइयां स्थापित करने की मांग करते रहे हैं परंतु उनकी यह मांग भी ठंडे बस्ते में है।
बजट को लेकर किसान और बागवान उम्मीद लगाए हैं कि इस बार प्रदेश में कृषि और बागवानी फसलों की बिक्री के लिए प्रदेश में टर्मिनल मंडियां विभिन्न सुविधाओं से लैस कर तैयार की जाएं। बागवानों और किसानों को आधुनिक तकनीक के लिए वित्तीय मदद मिले ताकि किसान अधिक पैदावार ले सकें।
क्या कहते हैं किसान बागवान नेता
हिमाचल प्रदेश फल और सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि किसानों की आय दोगुना करने के लिए कोल्ड स्टोर और विधायन इकाइयां स्थापित करने के लिए बजट से उम्मीद है। प्रदेश में मंडियों और फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए भी बजट में प्रावधान की उम्मीद है।