कोरोना महामारी की मार से दुनिया भर में पैदा हुई मंदी के चलते अब विदेशों में भी भारतीयों के रोजगार पर भी संकट गहरा रहा है। जैसे-तैसे विदेश जाकर रोजी-रोटी कमाने वाले भारतीयों को विदेशी कंपनियां अब नौकरी से निकाल रही हैं। कोरोना संकट में दर्जनों भारतीय विदेशों में अपनी नौकरी गंवाकर स्वदेश लौट रहे हैं। दुबई की एक कंपनी से हटा दिए जाने के बाद ऊना जिले के दो युवक भी लौट आए हैं।
इन युवकों के अनुसार भारत-नेपाल के अब तक करीब छह सौ से ज्यादा कामगारों को दुबई की कंपनी ने भारत भेज दिया है। दुबई से लौटे रायपुर सहोड़ां के युवक मनिंदर सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी से प्राइवेट सेक्टर की कई कंपनियों में कामकाज पूरी तरह से ठप है। दुबई में सालों से बस ड्राइवर रहे मंनिदर ने कहा कि सैकड़ों की तादाद में कंपनी की बसें हैं, जो मई के बाद से खड़ी हैं।
महामारी के इस दौर में नफे-नुकसान का आकलन कर कंपनी बाहरी देशों के कामगारों को वापस भेज रही हैं। बकौल, मंनिदर सिंह कंपनी ने नया फरमान जारी कर 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके तमाम कामगारों को भले ही वह किसी भी देश का हो, नौकरी से हटाना शुरू कर दिया है। मजबूरी में अब पेट्रो पदार्थ की सप्लाई में लगे टैंकर को चलाकर गुजर बसर हो रहा है।
इसी तरह लंबे अरसे से दुबई में रह रहे टेक्निकल कामगारों को भी नौकरी से हाथ धोकर अपने वतन लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। दुबई की ज्यादातर कंपनियां जिनमें भारतीय नौकरी कर रहे थे, बंद हो गई हैं। कामकाज पूरी तरह से ठप है। ऐसे में कंपनियां थोड़े-थोड़े समय अंतराल के बाद भारतीय कामगारों का हिसाब चुकता कर उन्हें वापस घर भेज रही हैं। इस मामले में पशुपालन, मत्स्य एवं कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर का कहना है कि दूसरों राज्यों और विदेशों से हिमाचल लौटे युवाओं को योग्यता के आधार पर रोजगार देने की योजना पर सरकार प्राथमिकता के साथ काम कर रही है।