प्रियंका ने बताया कि नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी उजहोर्ड स्लोवाकिया बॉर्डर से मात्र चार किलोमीटर दूर है। हंगरी बॉर्डर 23 किलोमीटर दूर है। यूक्रेन में एक उजहोर्ड क्षेत्र ही ऐसा था। यहां कोई नुकसान नहीं हुआ। प्रियंका ने बताया कि एमबीबीएस का उनका अंतिम वर्ष था। मई में कोर्स पूरा होना था।
यूक्रेन-रूस युद्ध की भयावहता के बीच गुरुवार सुबह साढ़े पांच बजे सकुशल घर पहुंचने वाली हिमाचल प्रदेश के उपमंडल फतेहपुर की गोलवां पंचायत की प्रियंका धीमान पुत्री अशोक धीमान ने बताया कि डर की स्थिति में जो दिन गुजारे, वे कभी नहीं भूलेंगे। प्रियंका ने बताया कि नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी उजहोर्ड स्लोवाकिया बॉर्डर से मात्र चार किलोमीटर दूर है। हंगरी बॉर्डर 23 किलोमीटर दूर है। यूक्रेन में एक उजहोर्ड क्षेत्र ही ऐसा था। यहां कोई नुकसान नहीं हुआ। प्रियंका ने बताया कि एमबीबीएस का उनका अंतिम वर्ष था। मई में कोर्स पूरा होना था। स्थिति बिगड़ने पर यूक्रेन छोड़ने को कहा गया। कांट्रेक्टर के माध्यम से हंगरी का छह घंटे का सफर जगह-जगह ट्रैफिक जाम लगने की वजह 22 घंटे में पूरा हुआ।
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इंडियन एंबेसी ने हंगरी के बुडापेस्ट एयरपोर्ट में खाने का इंतजाम किया था। पहली मार्च को हंगरी के बुडापेस्ट से रात साढ़े सात बजे दिल्ली के लिए फ्लाइट ली। दो मार्च सुबह नौ बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सरकार की ओर से दी गई सुविधा के बाद हिमाचल भवन में 11 बजे दोपहर से शाम सात बजे तक वहां रहे। फिर प्रदेश सरकार की ओर से वोल्वो बस के माध्यम से गुरुवार सुबह साढ़े पांच बजे अपने घर सकुशल पहुंचने का सौभाग्य मिला। गोलवां के प्रधान संजीव पप्पू ने उनका स्वागत किया।