शोधकर्ताओं ने सुझाया है कि साइकोलॉजिकल डिस्ट्रेस के मामले में ध्यान का अभ्यास उपचार के लिए एक वैकल्पिक तरीका है। इससे चिंता और तनावग्रस्त मरीज बगैर दवा के ठीक हो सकते हैं। हिमाचल के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक डा. रविचंद्र शर्मा का कहना है कि विदेशी विश्वविद्यालय की ओर से किया यह शोध लोगों के लिए उपयोगी होगा।
आईजीएमसी शिमला के प्रिसिंपल डा. शर्मा ने कहा कि ये बातें लगातार स्थापित हो रही हैं कि योग-प्राणायाम से मानसिक तनाव कम किया जा सकता है। मस्तिष्क में एक ऑटोनॉमस सिस्टम होता है। इसी से दिल का धड़कना, सांस चलना, पसीना आना जैसी तमाम आंतरिक गतिविधियां स्वचालित रहती हैं। इसी सिस्टम में एक उत्तेजना पैदा करने वाला और दूसरा शांति पैदा करने वाला भाग होता है। इनमें अलग-अलग हारमोन पैदा होते हैं।
उत्तेजना वाला भाग तब गलत तरीके से अति सक्रिय होता है, जब दिनचर्या में नकारात्मक दबाव हो। इसके मानसिक तनाव होता है। योग और ध्यान से इस भाग की अति सक्रियता कम हो सकती है और शांति वाले हिस्से को सक्रिय किया जा सकता है। बौद्ध भिक्षुओं की दिनचर्या ही ऐसी होती है कि उनका शांति पैदा करने वाला हिस्सा ज्यादा सक्रिय रहता है। इसलिए वे कम तनावग्रस्त होते हैं।