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1383 कंप्यूटर शिक्षकों को जयराम सरकार ने दिया बड़ा झटका

Sun, 01 Jul 2018 02:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नवीं से जमा दो कक्षा तक कंप्यूटर शिक्षा दे रहे शिक्षकों को जयराम सरकार ने बड़ा झटका दे दिया है। आउटसोर्सिंग पर नियुक्त इन कंप्यूटर शिक्षकों के लिए अनुबंध नीति बनाने की जगह सरकार ने कंपनी को एक साल का सेवा विस्तार दे दिया है। 30 जून 2019 तक सरकार ने कंपनी को एक्सटेंशन दी है।

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शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशालय ने इसके आदेश जारी किए। 1383 कंप्यूटर शिक्षक बीते कई सालों से अपने लिए अनुबंध नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। पूर्व सरकार ने शिक्षकों के लिए नीति बनाने की घोषणा की थी।

साल 2017 मे उच्च शिक्षा निदेशालय ने साक्षात्कार के माध्यम से 1093 पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी लेकिन मामला प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में फंस गया। ट्रिब्यूनल ने भर्ती पर रोक लगाई हुई है।
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वर्तमान में भी यह कोर्ट में विचाराधीन है। उधर, सत्ता परिवर्तन होने के बाद कंप्यूटर शिक्षकों में अनुबंध नीति बनाए जाने की उम्मीद जगी थी लेकिन जयराम सरकार ने नाइलेट कंपनी को ही सेवा विस्तार देकर शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

कंपनी को तीसरी बार मिला सेवा विस्तार

सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए नाइलेट कंपनी के साथ सरकार ने करार किया है। कंपनी के माध्यम से ही शिक्षकों की नियुक्ति होती है। नाइलेट कंपनी के साथ सबसे पहले साल 2013 से लेकर 2016 तक शिक्षक मुहैया करवाने के लिए एमओयू हुआ था।

बाद में एमओयू को साल 2016-17 और 2017-18 के दौरान एक-एक साल के लिए बढ़ाया गया। अब जयराम सरकार ने साल 2018-19 के लिए भी कंपनी को सेवा विस्तार दे दिया है।

2016 में 176 दिन चला था अनशन- कंप्यूटर शिक्षकों ने साल 2016 में अनुबंध नीति की मांग को लेकर 176 दिन तक क्रमिक अनशन किया था। चार जुलाई 2016 से जारी कंप्यूटर शिक्षकों की हड़ताल 27 दिसंबर 2016 तक चली थी।

176 दिन तक क्रमिक अनशन पर रहे कंप्यूटर शिक्षकों को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अनशन स्थल पर जाकर अनुबंध नीति बनाने का आश्वासन दिया था। तत्कालीन युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह ने कंप्यूटर शिक्षकों को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया था।

2500 स्कूल प्रिंसिपलों को जल्द मिलेगी स्थायी नियुक्ति

सरकारी स्कूलों में प्लेसमेंट आधार पर नियुक्त 2500 से अधिक प्रिंसिपलों को जल्द ही वित्तीय लाभ के साथ प्रिंसिपल के पद पर स्थायी नियुक्ति मिलेगी। प्लेसमेंट पर नियुक्त प्रिंसिपलों को स्थायी नियुक्ति देने की सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग की इस योजना को लेकर मंजूरी दे दी है। ऐसे में शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने मामले की फाइल समीक्षा को भेज दी है।

संभावित है कि एक माह के भीतर सरकार प्रिंसिपलों को बड़ी राहत देने के आदेश जारी करेगी। प्रिंसिपलों की पदोन्नति का मामला कोर्ट में लंबित था। राज्य के स्कूलों में तैनात प्रिंसिपलों को पदोन्नति मिलने के बावजूद भी एडहॉक पर ही सेवानिवृत्त होना पड़ रहा था। वरिष्ठता के आधार पर शिक्षा विभाग इन्हें प्रिंसिपल तो बनाता रहा लेकिन किसी भी तरह का वित्तीय लाभ नहीं दिया।

बीते साल अक्तूबर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिकों की वरिष्ठता के एक मामले पर हिमाचल उच्च न्यायालय के उस फैसले को यथावत रखा, जिसमें पूर्व सैनिकों की दोबारा नियुक्ति पर सेना की सेवा को वरिष्ठता में नहीं जोड़ने की बात कही थी। इस फैसले के आने के बाद से शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपलों को स्थायी पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू की थी।

विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगने से मामला लटक गया था। अब भाजपा सरकार ने दोबारा इस मामले पर काम शुरू किया है। बताया जा रहा है कि प्रिंसिपलों को बैकडेट से वित्तीय लाभ मिलेंगे। जो प्रिंसिपल सेवानिवृत्त हो गए हैं, उन्हें भी वित्तीय लाभ दिए जाएंगे।
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टीजीटी अध्यापक से वसूली के विभागीय आदेश निरस्त

हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने शिक्षक से रिकवरी (वसूली) के विभागीय आदेशों को निरस्त कर दिया है। ट्रिब्यूनल के सदस्य डीके शर्मा ने मंडी सर्किट के दौरान याचिकाकर्ता राजीव सोनी की याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया।

अधिवक्ता एसपी चटर्जी के माध्यम से ट्रिब्यूनल में दायर याचिका के अनुसार शिक्षा विभाग ने 24 जून 2017 को पत्र जारी करके टीजीटी नॉन मेडिकल अध्यापक राजीव सोनी से 43804 रुपये की रिकवरी करने के आदेश दिए थे।

याचिकाकर्ता ने आदेश को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी। ट्रिब्यूनल ने फैसले में कहा कि रिकवरी संबंधी आदेश विभाग की ओर से याचिकाकर्ता की सुनवाई किए बगैर पारित किए गए हैं। इसके अलावा यह अतिरिक्त राशि किसी धोखाधड़ी के कारण जारी नहीं की गई है बल्कि यह राशि याचिकाकर्ता को बतौर बकाया भुगतान जारी की गई थी।

ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय की ओर से पंजाब सरकार बनाम रफीक मसीह मामले में यह व्यवस्था दी गई है कि क्लास 3 और 4 के अधिकारियों से अधिक जारी की गई राशि वसूल नहीं की जा सकती। इसके चलते ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ता से वसूली करने के विभागीय आदेश को निरस्त करने का फैसला सुनाया है।
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