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Shimla News: दूसरे की जगह परीक्षा देने पर दो युवकों की सजा बरकरार

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मैहली में फर्जी उम्मीदवार बन दी थी बैंक की परीक्षा
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अदालत ने कहा, यह समाज और प्रणाली से धोखा
संवाद न्यूज एजेंसी

शिमला। सत्र न्यायालय ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ऑनलाइन परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थी बनकर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने वाले दो युवकों की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला पुख्ता साक्ष्य पर आधारित है और इसमें किसी हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। दोनों दोषियों की दो वर्ष की परिवीक्षा (दो साल तक अदालत की निगरानी में रहेंगे) की शर्तें यथावत रहेंगी।

मामला वर्ष 2016 का है। 26 जून को बेल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी मैहली में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की ओर से एसबीआई क्लर्क भर्ती परीक्षा आयोजित की जा रही थी। परीक्षा के दौरान निरीक्षण में अधिकारियों ने पाया कि एक अभ्यर्थी की पहचान उसके प्रवेश पत्र से मेल नहीं खा रही। जांच में खुलासा हुआ कि अमन सैनी निवासी ऋषि नगर कैथल (हरियाणा) ने संदीप कुमार, तहसील अलेवा जिला जींद (हरियाणा) की जगह परीक्षा दी थी। पुलिस ने परीक्षा केंद्र से प्रवेश पत्र, उपस्थिति शीट और फोटोग्राफ जब्त किए तथा फिंगर प्रिंट ब्यूरो भराड़ी को भेजे। पुलिस ने प्रवेश पत्र, उपस्थिति शीट और फोटोग्राफ के आधार पर दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया।
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मामले की सुनवाई के दौरान 16 गवाहों की गवाही और फोरेंसिक रिपोर्ट ने आरोपों की पुष्टि की। अब दोनों दोषियों ने इस दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की थी। लेकिन सत्र न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने अपील को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और दोषसिद्धि तथा सजा का आदेश यथावत रखा। न्यायालय ने टिप्पणी की कि फर्जी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देना न केवल धोखाधड़ी है बल्कि यह समाज और प्रणाली के साथ धोखा है। ऐसे अपराधों को सख्ती से रोका जाना आवश्यक है।
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29 अगस्त 2024 को ट्रायल कोर्ट का फैसला
29 अगस्त 2024 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 419 (छल/ प्रतिरूपण) तथा हिमाचल प्रदेश कुप्रथा निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 7 के तहत दोषी ठहराया था। दोनों को दो वर्ष की परिवीक्षा सजा सुनाई थी। इस शर्त पर कि वह इस अवधि में कोई अपराध नहीं करेंगे और 50,000 के निजी मुचलके व एक जमानतदार प्रस्तुत करेंगे।
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