हिमाचल के मंडी जिले की दो नन्ही बहनें पशु बलि रोकने में दूसरों के लिए प्रेरणा बन गईं। दोनों की जिद्द ने हिमाचल में सदियों से चली आ रही इस प्रथा पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बेटियों की इस पहल से पंजाई क्षेत्र के देव पुंडरीक ऋषि मंदिर में बलि न देने का फैसला लिया गया। देखादेखी अन्य मंदिरों में भी बलि प्रथा बंद की गई।
मंडी के सराज क्षेत्र के थाची गांव की परिष्टि और अविष्टि की मिसाल अब हर गांव और हर घर में दी जाती है। भले ही सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट ने पशु बलि पर रोक लगाई हो, लेकिन देवभूमि के मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर पशु बलि दी जाती रही है। चार साल पहले अपने गांव के मंदिर में पशु बलि देख दोनों बच्चियों का दिल पसीज गया। उन्होंने पिता डॉ. आरआर ठाकुर को साथ लेकर इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी।
परिष्टि उस समय छह और अविष्टि महज तीन साल की थी। गांव-गांव जाकर देवताओं के कारिंदों को मनाने की मुहिम शुरू की। परिष्टि और अविष्टि ने वर्ष 2013 में बलि प्रथा को खत्म करने के लिए पंजाई, काओ, डोभा, छेत, बछाहड़, मुहलू, बसाण, सेगला आदि गांवों के लोगों को साढ़े चार सौ से अधिक पत्र लिखे। पुजारियों को मनाया।