जिला मंडी के बालीचौकी इलाके की इन दो मासूम बच्चियों की उम्र वैसे तो गुड्डे-गुड़ियों से खेलने की है, लेकिन ये देव समाज की पुरानी परंपरा को बदलने में अहम भूमिका निभाने जा रही हैं।
सराज की दो बहनों साक्षी और अक्षि ने पंजाई के देवता पुंडरिक के कारदारों, गूर और पुजारियों को करीब दो सौ पत्र लिखकर झील के किनारे पशु बलि न देने का आग्रह किया है।
पंजाई के देवता पुंडरिक के आषाढ़ हूम के दिन नौ बलियां दी जाती हैं। इनमें सात मेमने, दो मछलियों और केकड़े की बलि रहती है। ये बलियां देव पुंडरिक ऋषि जल सरोवर के किनारे दी जाती हैं। इस दौरान देवता का रथ झील में प्रवेश करता है।