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Shimla News: चरस तस्करी में महिला समेत दो को 11-11 साल का कठोर कारावास

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विशेष न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने सुनाया फैसला, दोनों दोषियों को एक-एक लाख का जुर्माना भी लगाया
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वर्ष 2024 में आईजीएमसी के पास चरस के साथ पकड़े थे दोनों
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चरस तस्करी के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को 11-11 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए यह फैसला सुनाया है।
इंद्रा देवी और अनीश मलिक को एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत दोषी ठहराया जबकि नानक चंद को बरी कर दिया गया। अदालत ने दोषियों को कठोर कारावास के साथ ही एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर दो-दो वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। अदालत ने कहा कि पहले से जेल में बिताई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार 21 अगस्त 2024 को आईजीएमसी शिमला के कैंसर अस्पताल के पास पुलिस को सूचना मिली कि इंद्रा देवी और अनीश मलिक चरस बेचने की कोशिश कर रहे हैं। हेड कांस्टेबल मनोज कुमार के नेतृत्व वाली टीम ने तुरंत कार्रवाई को अंजाम दिया।
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तलाशी के दौरान इंद्रा देवी के पास से 1.100 किलोग्राम चरस बरामद हुई। केस की जांच एएसआई प्यार सिंह ने की। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि चरस नानक चंद की थी जिसे शिमला के लकी को पहुंचाने के लिए दिया था। अदालत ने अभियोजन पक्ष के 24 गवाहों और ढेर सारे दस्तावेजी सबूतों (सीजर मेमो, एनसीबी फॉर्म, सीडीआर, एसएफएसएल रिपोर्ट, फोटोग्राफ की विस्तार से जांच की। अदालत ने कहा कि आरोप इंद्रा देवी और अनीश मलिक के विरुद्ध साबित हुए हैं। अदालत ने माना कि दोनों के पास संयुक्त रूप चरस कब्जे में थी। हालांकि स्वतंत्र गवाह अपने बयानों से मुकर गए लेकिन आधिकारिक गवाहों, फोटोग्राफ तथा दस्तावेजी सबूतों ने रिकवरी को प्रमाणित किया। अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। दोनों दोषियों को अपील का अधिकार है। वह हाईकोर्ट में अपील दायर कर सकते हैं।
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