हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के कंदरोड़ी औद्योगिक क्षेत्र को हिमाचल के अगले फार्मास्युटिकल हब के रूप में चिह्नित किया गया है। इस औद्योगिक क्षेत्र में निवेश के लिए कई फार्मास्युटिकल और न्यूट्रास्युटिकल इकाइयों ने रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कंदरोड़ी औद्योगिक क्षेत्र पंजाब और हिमाचल की सीमा पर है। यहां सड़क, रेल और हवाई संपर्क की बेहतर सुविधाएं हैं। कंदरोड़ी में न्यूट्रास्युटिकल इकाई स्थापित करने के लिए मेफ्रो ऑर्गेनिक लिमिडेट ने गुरुवार को 100 करोड़ रुपये का निवेश संबंधी समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है। इसमें 200 व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व, कंदरोड़ी औद्योगिक क्षेत्र में 70 करोड़ के निवेश वाले ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट ऑफ न्यूट्रास्युटिकल्स को स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है, जिससे 300 व्यक्तियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। क्षेत्र में लगभग 170 करोड़ के निवेश और 500 व्यक्तियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उद्योग विभाग के निदेशक राकेश कुमार प्रजापति ने सरकार की ओर से समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। मेफ्रो ऑर्गेनिक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमित चड्ढा ने कंपनी की ओर से समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया।
मेडिकल डिवाइसिस पार्क के लिए नॉलेज पार्टनर के रूप में एनआईपीईआर के साथ समझौता ज्ञापन
वहीं, सरकार ने सोलन जिले के नालागढ़ में प्रस्तावित मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए नॉलेज पार्टनर के रूप में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) मोहाली के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन भारत सरकार के फार्मास्युटिकल विभाग के बोर्ड सदस्यों की ओर से अनुमोदित किया गया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि एनआईपीईआर मोहाली मेडिकल डिवाइस पार्क में उत्कृष्ट केंद्र स्थापित करेगा, जो उद्योग एवं शिक्षण गतिविधियों को जोड़ने का कार्य करेगा। राज्य योजना विभाग ने इस पार्क को विकसित करने के लिए राज्य कार्यान्वयन एजेंसी को 74.95 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। भारत सरकार का फार्मास्युटिकल विभाग भी शीघ्र ही इसके लिए 30 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता की पहली किस्त जारी करेगा। निदेशक उद्योग एवं हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध निदेशक राकेश कुमार प्रजापति ने इस अवसर पर राज्य सरकार की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जबकि राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने संस्थान की ओर से हस्ताक्षर किए।