तारादेवी के पास पकड़ी थी नशा सामग्री अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अदालत ने वर्ष 2022 में तारादेवी के पास एचआरटीसी की बस में 58.3 ग्राम हेरोइन (चिट्टे) की बरामदगी के मामले में दोनों आरोपियों विपिन कुमार और अंकित कुमार को बरी कर दिया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायाधीश देविंद्र कुमार की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन की कहानी में इतने गंभीर विरोधाभास और खामियां हैं कि अपराध संदेह से परे साबित नहीं हो सका। पुलिस ने अपनी जांच में दावा किया था कि भूरे रंग का बैग आरोपी विपिन कुमार की गोद में था लेकिन फोटोग्राफ में बैग आरोपी अंकित की गोद में दिख रहा है। इसको लेकर अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी के पास बैग का कब्जा साबित नहीं हुआ है। इसके अलावा गवाहों और पुलिस अधिकारियों में सील की संख्या को लेकर भी विरोधाभास पाया गया। स्वतंत्र गवाहों का कहना था कि चार सील लगाई गईं थीं जबकि पुलिस अधिकारियों के अनुसार सात सील लगाईं थीं। यही नहीं बस में कितने यात्री थे, कौन अंदर था, कौन बाहर था। हर बात पर अलग-अलग बयान सामने आए। वहीं फोटोग्राफ में बस पूरी तरह खाली दिख रही है। पुलिस ने दावा किया था कि बस में यात्री मौजूद थे। वहीं दूसरे गवाह ने पूरी बरामदगी से ही इन्कार कर दिया और अभियोजन ने उसे शत्रु गवाह घोषित कर दिया। इसके अलावा कई विसंगतियां पाई गईं। अदालत ने अपने आदेश के अंत में लिखा कि जब स्वतंत्र गवाह पुलिस की कहानी का समर्थन नहीं कर रहे हैं और आधिकारिक गवाहों के बयानों में ही इतने गंभीर विरोधाभास है, तो हेरोइन की बरामदगी और उसकी शुद्धता पर गंभीर संदेह पैदा होता है। ऐसी स्थिति में आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना ही चाहिए। अदालत ने दोनों अभियुक्तों को बरी करते हुए तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं।