प्रदेश सरकार के साथ दोबारा एमओयू करने के लिए सतलुज जल विद्युत निगम ने 210 मेगावाट के लुहरी और 66 मेगावाट के धौलासिद्ध बिजली परियोजना को री-डिजाइन किया है। लुहरी प्रोजेक्ट में अब टनल नहीं बनेगी। धौलासिद्ध की हाई कॉस्ट की दिक्कतें भी सरकार ने दूर कर दी हैं।
ऐसे में दोबारा से सरकार के साथ इसको लेकर एमओयू हुआ है। कुछ साल पहले भी सरकार ने इन परियोजनाओं को लेकर एसजेवीएन के साथ एमओयू किया था। पुरानी समस्याएं दूर होते ही निगम दोबारा से इन परियोजनाओं पर काम करने में जुट गया है।
आगामी छह माह में दोनों परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा। शनिवार को निगम के अध्यक्ष नंदलाल शर्मा ने शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 780 मेगावाट के जंगी थोपन पोवारी प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए सर्वे शुरू कर दिया है।
नंदलाल ने बताया कि 2018-19 में एसजेवीएनएल का राजस्व 12 फीसदी बढ़ा है। निगम को 844 करोड़ का लाभांश हुआ है। वर्तमान में 2015 मेगावाट उत्पादन कर रहे निगम ने साल 2040 तक 25 हजार मेगावाट का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योजनाएं बना ली गई हैं।
साल 2023 तक पांच हजार मेगावाट और 2030 तक 12 हजार मेगावाट का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि चिनाब और स्पीति बेसिन पर परियोजनाएं बनाने के लिए एक ही कंपनी को काम दिया जाना चाहिए। इससे लागत कम आएगी और काम भी तेजी से पूरा होगा।