पशु बलि प्रथा पर हाईकोर्ट के फैसले ने देव समाज और जिला प्रशासन को आमने-सामने कर दिया है। देव समाज जहां पशु बलि को देव परंपरा से जोड़ रहा है, वहीं प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश मनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।
अभी जगती (देव संसद) और हाईकोर्ट की पुनर्विचार याचिका का फैसला आना बाकी है लेकिन इससे पहले ही दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ है। पशु बलि प्रथा से रोक नहीं हटी तो दशहरे पर प्रशासन और देव समाज में टकराव तय माना जा रहा है।
उपायुक्त कुल्लू एवं दशहरा मेला कमेटी अध्यक्ष राजेश कंवर का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन हर हाल में करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई है। लेकिन जो भी होगा, सब कोर्ट के आदेश अनुसार ही होगा।
कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम कहते हैं कि पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। 26 सितंबर को होने वाली जगती का फैसला ही देव समाज के लिए अंतिम होगा। जगती के फैसले को किसी भी हाल में बदला नहीं जाएगा।