शिमला के स्मार्ट सिटी से बाहर होने के बाद राजनीतिक रोटियां सेंकने का दौर शुरू हो चुका है। नगर निगम के सदन में कांग्रेस के पार्षदों ने नगर निगम और महापौर पर इसका ठीकरा फोड़ दिया। सदन में उप महापौर ने कांग्रेस पार्षदों को इसका कड़ा जवाब भी दिया और कहा कि राज्य सरकार की नाकामी की वजह से यह सब हुआ है।
स्मार्ट सिटी से संबंधित बैठकों में महापौर और नगर निगम के कमिश्नर तक को नहीं बुलाया गया। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को आड़े हाथों लिया। इनकी खींचतान के बाद भाजपा भी कहां चुप बैठने वाली थी उनकी ओर से भी स्मार्ट सिटी मामले में राज्य सरकार को घेरा गया। भाजपा की ओर से दावा किया गया कि उन्होंने इस मामले में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।
आम जनता का कहना है कि काश हमारे ये नेता स्मार्ट सिटी की लिस्ट जारी होने से पहले एकजुट होकर काम करते तो शायद आज शिमला का नाम भी इस लिस्ट में होता।शुक्रवार को माकपा के पार्षदों और पूर्व पार्षदों ने भी इस मामले में नगर निगम को पाक साफ बताते हुए राज्य सरकार, मंत्री और भाजपा सांसद को दोषी ठहराया है।
पार्षद दीक्षा ठाकुर, कांता सुयाल और समर हिल से पार्षद रहे राजीव ठाकुर और धनी राम कश्यप ने कहा कि शिमला शहर को स्मार्ट सिटी से बाहर का रास्ता दिखाने में प्रदेश के मंत्री, सरकार और हमीरपुर के भाजपा संसद अनुराग का सीधा हाथ रहा है। इनका कहना है कि भारत सरकार की एक योजना के तहत देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए चुना जाना था जिसमें 98 शहरों का चुनाव किया जा चुका है। शिमला शहर ऐतिहासिक दृष्टि से भी पहचान रखता है। लेकिन षड्यंत्र के तहत स्मार्ट सिटी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
बैठक में क्यों नहीं बुलाए महापौर-उपमहापौर
हिमाचल सरकार की ओर से जारी एक आदेश के तहत राज्य के 56 शहरों से पूछा गया कि वह बताए कि उन्हें क्यों स्मार्ट सिटी में लिया जाए। इस पर की गई बैठक में शिमला के महापौर और उप महापौर को सदस्य होने के बाद भी आमंत्रित नहीं किया गया। इसकी वजह यह थी शिमला को बाहर कर धर्मशाला को शामिल किया जा सके।
हर मापदंड में धर्मशाला पीछे, फिर चयन कैसे
पार्षदों ने कहा है कि स्मार्ट सिटी में शामिल करने के लिए तय मापदंडों में भी धर्मशाला कोई भी मापदंड पूरा नहीं करता। इसके तहत ई-लेटर, ऑनलाइन बिल की अदायगी, पानी की आपूर्ति, शहर में डोर टू डोर कूड़ा उठना, स्ट्रीट लाइट् की स्थिति और जेएनएनयूआरएम परियोजना की स्थिति इत्यादि महत्वपूर्ण थी।
सुधीर और भाजपा सांसद का है हित
पार्षदों का आरोप है कि धर्मशाला को जिस जेएनएनयूआरएम के 10 अंकों की बदौलत स्मार्ट सिटी में लिया गया वो परियोजना धर्मशाला में चल ही नहीं रही। शिमला शहर इन सब में प्रदेश में अव्वल है। इसमें धर्मशाला के स्थानीय विधायक एवं शहरी विकास मंत्री मंत्री सुधीर शर्मा और दूसरी तरफ भाजपा सरकार के सांसद अनुराग का राजनीतिक हित सर्वोपरि रहा है। धर्मशाला में स्मार्ट सिटी के तहत सुविधा संपन्न बनाने के मद्देनजर भी स्मार्ट सिटी को शिमला की जगह धर्मशाला बदला गया है।