बोर्ड परीक्षाओं में चहेते शिक्षकों को ही ड्यूटी पर लगाने के आरोप का मामला गरमा गया है। इस मामले को लेकर प्रदेश स्नातकोत्तर संघ और राजकीय अध्यापक संघ आमने-सामने हो गए हैं।
राजकीय अध्यापक संघ की ओर से वीरवार को शिकायतकर्ता पर उठाए गए सवालों पर प्रदेश स्नातकोत्तर संघ भड़क गया है। स्नातकोत्तर संघ के पदाधिकारियों ने राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष की ओर से की गई व्यक्तिगत टिप्पणी की आलोचना की है।
प्रदेश स्नातकोत्तर संघ के महासचिव देसराज कटवाल, वरिष्ठ उपप्रधान मनीश शर्मा, कर्म सिंह ठाकुर, उपप्रधान विनोद बंसल, दिनेश कुमार, मुख्य प्रेस सचिव मोहन शर्मा, वित्त सचिव रामलाल और मुख्यालय सचिव प्रेम शर्मा ने कहा है कि स्नातकोत्तर संघ के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन काल्टा ने एक सामान्य मुद्दे को उठाया था।
राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान का इस मामले पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना गलत है। यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है। प्रदेश स्नातकोत्तर संघ के अध्यक्ष चितरंजन काल्टा ने कहा है कि बीते पांच साल के दौरान राजकीय अध्यापक संघ के प्रधान की कितनी बार परीक्षाओं में ड्यूटी लगी, इसकी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वीरेंद्र चौहान का इस मामले को तूल देना दर्शाता है कि ड्यूटियां लगाने में जरूर गड़बड़झाला होता है। काल्टा ने कहा कि अगर भविष्य में कोई व्यक्तिगत बयानबाजी की गई तो मानहानि का केस किया जाएगा। उन्होंने शिक्षा विभाग से राजकीय अध्यापक संघ के पंजीकरण प्रमाण पत्र और सरकार से संबद्धता प्रमाण पत्र की जांच करने की भी मांग की है।