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सुक्खू के बारे में ये क्या बोल गए सीएम?

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि लोकसभा चुनाव की हार के पोस्टमार्टम में जुटे प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हद से बाहर से जा रहे हैं। हार पर मंत्री-विधायकों को पत्र लिखने के सुखविंदर सुक्खू के कदम पर मुख्यमंत्री ने कहा - ही हैज गॉन टू फॉर।
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इससे किसी का भला नहीं होगा। ये वन मैनशिप दिखाने जैसी बात है, जिससे कुछ नहीं निकलेगा। मुख्यमंत्री सचिवालय में मीडिया से बात कर रहे थे। वीरभद्र सिंह ने दोहराया कि कांग्रेस राज्य सरकार की कमियों के कारण हिमाचल में चुनाव नहीं हारी, बल्कि इसके लिए राष्ट्रीय मसले और नरेंद्र मोदी का आक्रामक प्रचार जिम्मेदार था। ये सिर्फ हिमाचल में नहीं हुआ।
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मोदी का प्रचार बना हार का कारण

कांग्रेस ने परंपरागत तरीके से चुनाव लड़ा, जो मोदी के भारी-भरकम प्रचार के आगे काफी नहीं था। अब इस पर हल्ला करके क्या मिलेगा? कांग्रेस के भीतर जो लोग पहले से ही विवादित बयान देने के आदी हैं, वे अब भी बोल रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष उन पर नकेल क्यों नहीं कसते? क्या ये पार्टी के क्षेत्राधिकार का मसला नहीं है?

ये पूछे जाने पर कि हार के बाद मंडलों को भंग करने का विप्लव ठाकुर, आशा कुमारी और कुलदीप राठौर ने विरोध किया है। कुछ ने ये आरोप भी लगाए हैं कि सरकार में कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है।

जवाब में वीरभद्र सिंह ने कहा कि कुछ लोग मीडिया में भड़ास तो निकाल रहे हैं, लेकिन ये कांग्रेस का मत नहीं है। सरकार में कांग्रेस कार्यकर्ता की अनदेखी नहीं हो रही। इसलिए इस तरह के बयानों से बचा जाना चाहिए।

एमबीबीएस सीटें नहीं कम होने देंगे

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि सरकार आईजीएमसी और टांडा की एमबीबीएस सीटें कम नहीं होने देगी। एमसीआई ने अभी केवल सिफारिश की है। राज्य सरकार इन कमियों को दूर कर रही है। हमने अपना जवाब एमसीआई को दिया है।

इससे मसला हल हो जाएगा। जहां तक ईएसआई मेडिकल कॉलेज नेरचौक को शुरू करने का प्रश्न है, तो इस पर नई केंद्र सरकार के रुख का इंतजार है।
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इंजीनियरिंग कॉलेजों पर विभाग देगा रिपोर्ट

मुख्यमंत्री ने कहा कि एडमिशन विवाद केवल प्राइवेट इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक का है। कुछ लोग इस मसले पर उनसे मिले भी हैं। उन्होंने तकनीकी शिक्षा विभाग से इस बारे में पूछा है।

साथ ही निजी कॉलेजों को भी कहा है कि गुणवत्ता के लिए लगाई गई न्यूनतम शर्तों का वे भी पालन करें। ये मसला जल्द हल हो जाएगा। सरकारी कॉलेजों को कोई समस्या नहीं है।
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