मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस्तीफा मांगने के बयान पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पर तीखा हमला बोला है। ज्वालामुखी दौरे के दूसरे दिन जनसभा के दौरान कहा कि नड्डा ने जो बयान दिया, वह उनकी सोची समझी राजनीति का हिस्सा है। लगता है कि जेपी नड्डा की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है।
भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लिए रेस चल रही है। नड्डा ने मेरे इस्तीफे की मांग इसलिए की क्योंकि वह मुख्यमंत्री की रेस में शामिल होना चाहते हैं। इस रेस में कहीं वह पिछड़ न जाएं इसलिए वह भी अब मेरे विरुद्ध बयानबाजी पर उतर आए हैं। जनसभा में चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि ‘बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह’।
सीएम ने कहा कि हिमाचल की जनता ने कांग्रेस को बहुमत देकर सत्ता पर काबिज किया है। प्रदेश की जनता का प्यार और विश्वास कांग्रेस सरकार पर पूर्ण रूप से कायम है। वहीं, अनौपचारिक वार्ता के दौरान चुनाव के लिए अरुण धूमल को प्रोजेक्ट करने की तैयारी के एक सवाल पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि सिर्फ मेरे खिलाफ आरोप लगाकर अरुण धूमल चुनाव नहीं जीत पाएंगे।
बंदर के हाथ में हल्दी की गांठ- सीएम ने नाम लिए बिना नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल और उनके परिवार की तुलना बंदर से कर दी। उन्होंने कहा कि जैसे बंदर के हाथ में हल्दी की गांठ आ जाती है, उसी प्रकार धूमल और उनके परिवार भी राजनीति में आ गए हैं। चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि यह तो वही बात हो गई कि बंदर के हाथ में हल्दी की गांठ।
मेरे खिलाफ बुना जा रहा जाल- मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मंच से मैं केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बारे में जनता को अवगत करवाना चाहता हूं। जब केंद्र में यूपीए सरकार थी, तब उनकी ओर से फर्जी नाम से लिखी शिकायत मेरे खिलाफ की गई। लेकिन, जांच के दौरान शिकायतकर्ता का नाम व पता गलत निकला। फिर अरुण जेटली ने अपने नाम से शिकायत की।
बार-बार एक ही मामले की जांच करवाकर मेरे खिलाफ जाल बुना जा रहा है। लेकिन, अंत में जीत सच्चाई की ही होगी। राजनीतिक प्रतिशोध के चलते मुझ पर उंगली उठाई जा रही है। सीएम ने कहा कि मैं 1962 से राजनीति में हूं लेकिन राजनीति का इतना गिरता स्तर पहले कभी नहीं देखा। प्रदेश और देश में राजनीति का गिरता स्तर चिंता का विषय है। जिस प्रकार राजनेताओं द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग हो रहा है, उसे मीडिया में स्थान दिया जा रहा है।
उससे देश की ही छवि को नुकसान हो रहा है। आलोचना का मुकाबला मैं करता आया हूं। कटु से कटु आलोचना भी सभ्य भाषा में हो सकती है। लेकिन महीनों से ही आलोचना चलती रहे तो राजनीतिक जीवन पर असर पड़ता है। जनता को सच पता होना चाहिए। इसलिए, आज जनता के साथ यह अपनी दिल की बात साझा कर रहे हैं। विपक्ष का असली चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो जाएगा।