जब भी कांग्रेस पार्टी की कहीं सभाएं होती थीं, वहां जीते हुए विधायक का नाम लेने के बजाय हारे नेताओं के नाम मंच से बोले जाते थे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि पूर्व सरकार के समय में विधायक अनेकों बार जलील हुए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार विधायकों की गरिमा व सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार पूर्व में हुई गलतियों को दोहराना नहीं चाहती और सभी अच्छे सुझावों पर गौर किया जाएगा।
इससे पहले ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने विधायक जगत सिंह नेगी के प्रश्न के उत्तर में कहा कि एलएडीसी में विधायक को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व कांग्रेस सरकार के समय लाहौल-स्पीति के विधायक को लाडा का चेयरमैन नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा कि हर जिला में यही परंपरा है कि डीसी कमेटी का चेयरमैन बने।
उन्होंने कहा कि 2006 में बनी ऊर्जा नीति में 5 मेगावाट पर 1 फीसदी और इससे ऊपर के प्रोजेक्टों पर डेढ़ फ ीसदी एलएडीसी राशि लिए जाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2012 में डीसी को लाडा का चेयरमैन बनाने की प्रथा शुरू हुई।
विधायक जगत सिंह नेगी ने किन्नौर के विधायक को लाडा का चेयरमैन न बनाए जाने को जनमत का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा राजनीतिक द्वेष के कारण हुआ है।
उन्होंने कहा कि मंत्री का दर्जा मुख्य सचिव से ऊपर है, विधायक का दर्जा डीसी से ऊपर होता है। फिर लाडा जैसे अध्यक्ष पद से विधायक को बाहर रखना सही नहीं है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार को विधायकों की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हेल्थ कमेटी सहित अन्य में विधायकों को स्थान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि विधायक को उचित मान-सम्मान मिले।
बाला सुंदरी मंदिर का मैं सदस्य भी नहीं : बिंदल
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने व्यवस्था देते हुए कहा कि मैं भी स्थानीय विधायक होने के नाते बाला सुंदरी मंदिर का सदस्य भी नहीं हूं। इसके विपरीत रेणुका विकास बोर्ड के विधायक अध्यक्ष हैं।
कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने सब्जी मंडी और मार्केट यार्ड के 30 ऐसे शिलान्यास कर दिए, जिनकी जरूरत नहीं थी। सिर्फ राजनीतिक फायदा लेने के लिए यह सब किया गया। इस मामले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक भी हुई।
मंत्री ने कांग्रेस विधायक नंद लाल के प्रश्न के उत्तर में कहा कि रामपुर में पूर्व सरकार ने 15 अगस्त 2017 में सब्जी मंडी का शिलान्यास किया। इसकी अभी तक न फ ोरेस्ट क्लीयरेंस हुई है और न ही प्राकलन तैयार हुआ है।
मंत्री ने कहा कि रामपुर के डकोलड़ में पहले से ही सब मार्केट यार्ड है, जिस पर 70 लाख रुपये की राशि खर्च की गई। यह रामपुर से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर है।
उन्होंने कहा कि जहां तक सब्जी मंडी खोलने का सवाल है, जब वन विभाग से फोरेस्ट क्लीयरेंस और धन का प्रावधान होगा, तब निश्चित तौर पर प्रदेश सरकार इस पर विचार करेगी।
बजट चर्चा के दौरान भाजपा के दो विधायकों में आपस में हल्की नोकझोंक हो गई। बजट चर्चा पर बोलते हुए विधायक राजेश ठाकुर ने अवैध खनन का मामला उठाया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि सदन में कुछ विधायक अवैध खनन पर तो बोलते हैं लेकिन शाम के समय उनके घरों में लोगों की लाइनें लगी रहती हैं। उन्होंने किसी भी विधायक का नाम नहीं लिया लेकिन इस पर भाजपा के ही राकेश पठानिया ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि वह और भाजपा पिछले तीन
सालों से अवैध खनन के खिलाफ लड़ाई लड़ती आ रही है और आगे भी लड़ेगी। अगर विधायक की इस तरह की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से नहीं हटाया गया तो वह इसके खिलाफ अवमानना प्रस्ताव लाने को मजबूर हो जाएंगे।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने यह कहकर कि विधायक ने चर्चा में हिस्सा के दौरान किसी भी सदस्य का नाम नहीं लिया है, इसके बाद चर्चा को आगे बढ़ा दिया।
बजट पर चर्चा के दौरान वीरवार को कोरम पूरा न होने को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। कांग्रेस की तरफ से विधायक जगत सिंह नेगी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि सदन में कोरम ही पूरा नहीं है, ऐसे में चर्चा का क्या मतलब है।
सत्ता पक्ष के भी कुछ ही विधायक सदन में मौजूद है। इससे साफ है कि सरकार चर्चा के प्रति गंभीर नहीं है। कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने भी कोरम न पूरा होने पर संसदीय कार्य मंत्री को घेरा।
जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि यह ठीक है कि कोरम पूरा कराना और सदन की कार्यवाही चलवाना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन नियमों में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि विपक्ष सदन में न बैठे। उन्होंने कहा कि सदन परंपराओं के अनुसार चलता है। कहा कि यह पहली बार है कि इस तरह का प्रश्न उठाया गया है।