सोलन जिला ट्रक ऑपरेटर (एसडीटीओ) यूनियन के पूर्व प्रधान रामकृष्ण शर्मा ने कहा कि वे दो माह से मंच से कह रहे हैं कि हिमाचल प्रदेश के लोगों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। आने वाले समय में अदाणी को संदेश देना चाहते हैं कि वे हिमाचल प्रदेश को अपनी मर्जी से नहीं चला सकते। यहां करते होंगे, वहीं चलेगा। अदाणी इस बात को समझ लें कि हम झुकने वाले नहीं हैं। छह महीने के लिए और खड़े रहने को तैयार हैं। सरकार की ओर से काफी सारे मोर्चों पर घेराबंदी हुई है। माइनिंग लीज कैंसल करने के बारे में नोटिस जारी किए गए हैं।
मुद्दा यह है कि सरकार के बदलने से मुलाजिमों की तनख्वाह कम नहीं होती है। 2010 की स्टैंडिंग कमेटी का बनाया हुआ फार्मूला है। इस रेट पर तो टैक्सियां भी नहीं चलती हैं, जिसकी अदाणी बात कर रहा है। सरकार के सामने जो बात होती है, वह छह और आठ रुपये देने की है। अब तो 10 रुपये पर आ गए हैं। टैक्सियां भी 20 और 25 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से चलती हैं। हमारी गाड़ी में 12 टन लोड डालकर कहा जाता है कि इसे टैक्सी से भी कम रेट दिए जा रहे हैं। हमने फार्मूले की बात की है। एक कानूनी दस्तावेज बनाया गया है। आज तो उसे देने से भी इंकार किया गया है।
10 रुपये 70 पैसे रेट से हम बिल्कुल भी नीचे नहीं आएंगे : ठाकुर
शिमला। जिला बिलासपुर ट्रक आपरेटर सहकारी सभा के प्रतिनिधि राकेश ठाकुर ने कहा कि बरमाणा में वे धरना दे रहे हैं। वहां माताएं और बहनें भी धरने में आ रही हैं। आने वाले समय मेें जितने भी ट्रांसपोर्टर हैं वे 10 रुपये 70 पैसे रेट से बिलकुल भी नीचे नहीं आएंगे। सब ऑपरेटरों ने इसे माना। सरकार ने बताया कि सीईओ ने दस रुपये और साढ़े आठ रुपये प्रति किलोमीटर मालभाड़ा करने की बात कर रहे थे।
राकेश ठाकुर ने शिमला में कहा कि बरमाणा का प्लांट 1983 से चल रहा है। तालाबंदी से पहले भी 11 रुपये 41 पैसे रेट दे रहे थे। पता नहीं क्यों दादागीरी कर रहे हैं। ये न तो उनकी बात मान रहे हैं और न ही सरकार की ही मान रहे हैं। वास्तव में देखा जाए तो हमारी गाड़ी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलती है। अदाणी ग्रुप की शर्त है कि अगर 50 हजार किलोमीटर हर साल चलाकर दिखाएं तो ही इस मालभाड़े पर मुहर लगाएंगे। इसके लिए डेढ़ सौ से ढाई सौ किलोमीटर प्रतिदिन सफर करना होगा। बार-बार निवेदन कर रहे हैं कि जो भी रेट हैं, उसे जारी करें। अदाणी ग्रुप के सीईओ आए थे। उनके साथ ट्रांसपोर्टरों की कोई भी बैठक नहीं हुई है। 10 रुपये सिंगल एक्सेल रेट और साढ़े आठ रुपये मल्टी एक्सेल ट्रक के रेट की बात हुई है। अल्ट्राटेक की तरह रेट मांगा था। हमने छह से सात प्रतिशत रेट और कम किया है।