विभागीय ट्राउट फार्म धमवाड़ी जिला शिमला से रेनबो ट्राउट मछली के 500 बच्चे 10 जनवरी को प्रयोग के तौर पर इन पिंजरों में डाले गए। इस प्रयोग से यह जांचने की कोशिश की गई कि 18 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में पनपने वाली अति संवेदनशील मछली क्या हिमाचल के गर्म इलाकों में भी जीवित रह सकती है।
विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 जनवरी को इन पिंजरों में ट्राउट के 500 बच्चे डाले, जिनमें 185 मछलियां 30 अप्रैल तक 250 से 300 ग्राम वजन तक विकसित हो गईं। शेष मछलियां नहीं बच सकीं।
250 से 300 ग्राम वजन का आकार टेबल साइज कहलाता है, जिसे बेचने के मुफीद माना जाता है। मेहता के मुताबिक विभाग अब इस पर और शोध कर सफलता का प्रतिशत बढ़ाने का प्रयास करेगा। भाखड़ा में जो ट्राउट मछलियां तैयार हुई हैं, उन्हें 450 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा।