हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजनीतिक हस्तक्षेप पर हुए तबादला आदेश को रद्द कर दिया है। कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी ने बिलासपुर के अध्यापक की शिमला ग्रामीण के लिए स्थानांतरण की सिफारिश की थी। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने ये आदेश पारित किए। मामले के अनुसार शशि कुमार हमीरपुर जिला के समताना स्कूल में टीजीटी के पद पर कार्यरत था। बिलासपुर के विधायक राजेश धर्माणी ने शिमला ग्रामीण के बसंतपुर के लिए उसके तबादले की सिफारिश की थी। आरोप लगाया गया था कि उसे राजनीतिक द्वेष के कारण स्थानांतरित किया गया है। हालांकि शिक्षा विभाग के पास याचिकाकर्ता को स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं थी। स्थानीय कांग्रेस नेता के निर्देशों के बाद ही विभाग ने स्थानांतरित पॉलिसी के विरुद्ध उसका तबादला किया है। दलील दी गई कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण विभाग ने उसका तबादला शिमला ग्रामीण के बसंतपुर में किया है। इन तबादला आदेशों में कोई भी जनहित और प्रशासनिक जरूरत नहीं है। आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ता का तबादला प्रताड़ित करने के लिए किया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विधायक बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र से हैं, जबकि उन्होंने हमीरपुर के अध्यापक के तबादले की सिफारिश किसी दूसरे विधानसभा के लिए की है। दलील दी गई कि राजनीतिक द्वेष के चलते किए गए तबादले हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसके तबादला आदेशों को रद्द किया जाए।
सेवानिवृत परिचालकों को दोबारा रोजगार देने के मामले में एचआरटीसी के प्रबंधन निदेशक तलब
पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में सेवानिवृत परिचालकों को दोबारा रोजगार देने पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने एचआरटीसी के प्रबंधन निदेशक को अदालत के समक्ष तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने ये आदेश पारित किए। मामले की सुनवाई 5 अप्रैल 2023 को निर्धारित की गई है। कौशल विकास योजना के तहत परिचालक का प्रशिक्षण ले चुके 174 युवाओं ने हाईकोर्ट के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि निगम में 476 परिचालकों की कमी चल रही है। इसके लिए निगम ने सेवानिवृत परिचालकों को दोबारा रोजगार देने की योजना बनाई है। इसके लिए निगम ने सरकार से स्वीकृति मांगी है। अदालत ने कहा कि जब निगम के पास परिचालकों के पद खाली हैं तो उस स्थिति में याचिकाकर्ताओं को पहले रोजगार देना चाहिए था। अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2015 में उन्होंने कौशल विकास योजना के तहत परिचालक का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उसके बाद उन्होंने तीन वर्ष तक अपनी सेवाएं निगम में दीं। वर्ष 2018 में उनकी सेवाओं को बर्खास्त कर दिया था। दलील दी गई कि जब निगम के पास प्रशिक्षित परिचालक हैं तो सेवानिवृत्त परिचालकों को दोबारा नियुक्ति क्यों दी जा रही है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई है कि उन्हें परिचालक के पद पर तैनात किए जाने के आदेश पारित किए जाएं।