जोगिंद्रनगर से कांगड़ा तक 80 किलोमीटर रेललाइन रेलगाड़ियों के लिए पूरी तरह से बहाल हुई है। शेष 60 किलोमीटर रेलवे लाइन के क्षतिग्रस्त हिस्से को पूरी तरह से बहाल करने के लिए दिसंबर तक का समय अभी भी लगेगा।
जोगिंद्रनगर-पठानकोट हेरिटेज रेलवे लाइन पर विश्व धरोहर रेलगाड़ी में रोमांचक सफर के इंतजार में यात्रियों को रेलवे विभाग ने जोरदार झटका देते हुए दिसंबर माह तक रेलगाड़ियां नहीं चलाने की हामी भरी है। जोगिंद्रनगर से कांगड़ा तक 80 किलोमीटर रेललाइन रेलगाड़ियों के लिए पूरी तरह से बहाल हुई है। शेष 60 किलोमीटर रेलवे लाइन के क्षतिग्रस्त हिस्से को पूरी तरह से बहाल करने के लिए दिसंबर तक का समय अभी भी लगेगा।
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शुक्रवार को उत्तर रेलवे विभाग के उच्चाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार पठानकोट से जोगिंद्रनगर की ओर चक्की पुल और ज्वालामुखी रोड के दोनों छोर, कोपरलाहड़ और गुलेर में रेलवे लाइन का कार्य अभी भी प्रगति पर चल रहा है। इसे बहाल करने के लिए अभी कुछ और माह लगेंगे। 10 जुलाई के बाद सभी रेल सेवाएं ठप पड़ी हैं। इससे पहले नूरपूर तक बीस से अधिक रेलवे स्टेशनों में दो रेलगाड़ियां आवागमन करते हुए जोगिंद्रनगर रेलवे स्टेशन में पहुंच रहीं थी।
रेलवे स्टेशन में हर रोज ऑनलाइन बुकिंग के लिए भी रेलयात्री पहुंच रहे हैं। जिन्हें जोगिंद्रनगर से पठानकोट की सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उधर, रेलवे विभाग के बैजनाथ-पपरोला रेलवे स्टेशन के अधीक्षक राजेश भारद्वाज ने बताया कि कोपर लाहड़ में क्षतिग्रस्त रेलवे लाइन के पूरी तरह से बहाल होने के बाद रेलगाड़ियों का आवागमन शुरू होगा। जोगिंद्रनगर रेलवे स्टेशन के अधीक्षक रविंद्र रावत ने बतया कि अधिसूचना जारी होने के बाद ही रेलगाड़ियां पटरी पर दौड़ेंगी।