प्रशिक्षित बेरोजगार मेडिकल लैबोरेटरी तकनीशियन संघ ने नई भर्ती में डिप्लोमा धारकों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। संघ के प्रदेश संयोजक पवन कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल लैबोरेटरी तकनीशियन के 674 पद भरने जा रही है। जिसमें जमा दो विज्ञान संकाय की शर्त लगाना और इन पदों के लिए पूरे देश से आवेदन मांगना तर्क संगत नहीं है।
यह फैसला प्रदेश के हजारों डिप्लोमा होल्डरों से अन्याय है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में एससीवीटी संस्थानों में मेडिकल लैबोरेटरी तकनीशियन की ट्रेनिंग करने के लिए दसवीं पास योग्यता के आधार पर करवाई गई और अब नौकरी के लिए जमा दो साइंस की शर्त रखना तर्क संगत नहीं है।
प्रदेश सरकार के इस फैसले बेरोजगार मेडिकल लैब तकनीशियन भड़क गए हैं। उन्होंने कहा कि 2007 अगस्त में वीरभद्र सरकार ने मेडिकल लैब तकनीशियन के 268 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें दसवीं पास योग्यता रखी गई थी तथा दो वर्ष का डिप्लोमा होना जरूरी माना गया था।
फिर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद धूमल सरकार ने इस भर्ती को रद्द कर दिया था, तब लेकर आज तक इन पदों को मर्जी से भरा गया। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जिन्होंने 2008 के पहले मान्यता प्राप्त संस्थानों से मेडिकल लैब तकनीशियन का डिप्लोमा किया है और पैरा मेडिकल काउंसिल में नाम दर्ज है, उनके लिए जमा दो साइंस की शर्त हटाई जाए और दसवीं पास डिप्लोमा होल्डर को नौकरी का मौका दिया जाए। इसके अलावा बाहरी प्रदेश के युवाओं से आवेदन स्वीकार न करें। अगर ऐसा किया गया तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।