पहली बार ट्रायल के लिए कालका-शिमला विश्व धरोहर रेललाइन पर गुरुवार को चलाई गई ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेलट हाइड्रोलिकन मल्टीप्लेन यूनिट) कालका रेलवे स्टेशन स्थित वर्कशॉप से करीब 50 मीटर दूर खड़ा हो गया। तीन डिब्बों वाली इस ट्रेन में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी। ट्रेन को वापस रेलवे स्टेशन लाना पड़ा। यहां तकनीकी टीम ट्रेन सेट में आई खराबी को जांच रही है। इसमें तकनीकी खामी को दूर करने के बाद दोबारा से ट्रायल शुरू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कालका-शिमला रेलवे लाइन पर विशेष ट्रेन सेट चलाई जानी है। इस ट्रेन में तीन डिब्बे लगाए गए हैं और यह रेल मोटर कार की तर्ज पर चलाई जाएगी। गुरुवार को इसका ट्रायल शुरू किया गया। इसके लिए आरडीएसओ (अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन) की टीम भी कालका पहुंची थी।
यह ट्रायल कालका से शिमला तक अप एंड डाउन होना था। कालका रेलवे स्टेशन से सुबह 10:50 बजे इसे चलाया गया। वर्कशॉप से लगभग 50 मीटर दूरी पार करने पर ट्रेन खड़ी हो गई। इसके बाद तकनीकी टीम को बुलाया गया। टीम जांच के बाद 11:30 बजे इसे वापस कालका स्टेशन पर लेकर पहुंची। रेलवे के इंजीनियर अब इसमें आई खराबी का पता लगा रहे हैं। हालांकि, अब इसके ठीक होने के बाद खाली ट्रेन सेट को ट्रायल के दौरान 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से चलाया जाएगा। बाद में इसे 28 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की स्पीड पर चलाने की योजना है। बोर्ड के अनुसार मार्च तक ट्रेन सेट का ट्रायल जारी रहेगा।
कालका रेलवे स्टेशन के अधीक्षक सीताराम ने बताया कि गुरुवार को ट्रेन सेट का ट्रायल किया गया मगर कालका रेलवे स्टेशन से करीब 50 मीटर दूर तकनीकी खराबी के कारण यह खड़ी हो गई। जल्द इसके ट्रायल दोबारा होंगे। आरडीएसओ की टीम ट्रायल पूरा होने के बाद अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपेगी।
इंजन रहित ट्रेन कहलाती है ट्रेन सेट
ट्रेन सेट को इंजन रहित ट्रेन भी कहते हैं क्योंकि इसमें कोच के अंदर ही इंजन लगे होते हैं। ट्रेन सेट में सुविधाजनक सीटों के अलावा, एसी, हीटर, एलईडी व डिस्प्ले बोर्ड की सुविधा भी उपलब्ध है। रेल मोटर कार के विकल्प के तौर पर चलाए जाने वाले ट्रेन सेट के तीनों कोच वेस्टिबुल (आपस में जुड़े) हैं। यात्री गाड़ी से उतरे बिना ही एक कोच से दूसरे में जा सकते हैं।