दूसरी तरफ मनाली की ओर से बीआरओ की 70 आरसीसी की टीम गुलाबा से थोड़ा आगे है। ऐसे में पर्यटक मनाली की तरफ से जून में ही रोहतांग दर्रा का दीदार कर सकेंगे। लाहौल के कोकसर की तरफ पर्यटक बर्फ के दीदार तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें रोहतांग दर्रा देखने की भी चाह है।
कोकसर आने वाले पर्यटक दूर से ही रोहतांग की वादियों को अपने कैमरे में कैद कर रहे हैं। सीमा सड़क संगठन की टीम रोहतांग दर्रा के दोनों छोर से बर्फ हटाने में जुटी हुई है। इस बार गत वर्ष के मुकाबले अधिक बर्फबारी होने से रोहतांग दर्रा बहाली में समय लग रहा है।
94 आरसीसी ने लाहौल की तरफ से दो स्नो कटर के साथ एक लोडर को बर्फ हटाने में लगा रखा है। यह टीम रोहतांग दर्रा से 11 किलोमीटर पीछे है। मनाली की तरफ से बीआरओ की टीम रोहतांग दर्रा से लगभग 20 किमी नीचे पहुंची है। 94 आरसीसी के कनिष्ठ अभियंता शुभम ने कहा कि कोकसर की तरफ से मशीन बर्फ हटाते हुए डोलमा मोड़ के पास पहुंच गई है।