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Tourist Shimla: बदला ट्रेंड, शहर से ज्यादा बाहरी क्षेत्रों में ठहरना पसंद कर रहे सैलानी

Mon, 05 Dec 2022 11:57 AM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

विंटर टूरिस्ट सीजन के दौरान बर्फबारी देखने की चाह में भी सैलानी शिमला शहर के स्थान पर कुफरी और नारकंडा के होटलों तथा होम स्टे में कमरे बुक करवा रहे हैं।
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शिमला के रिज मैदान पर रविवार को खिली धूप में घूमते सैलानी। संवाद
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विस्तार
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बाहरी राज्यों से छुट्टियां मनाने के लिए शिमला आने वाले सैलानी शहर के मुकाबले बाहरी क्षेत्रों में ठहरना अधिक पसंद कर रहे हैं। क्रिसमस और न्यू ईयर के लिए सैलानी शिमला की अपेक्षा मशोबरा, कुफरी और नारकंडा के होटलों में कमरे बुक कर रहे हैं। 23 दिसंबर से 1 जनवरी तक के लिए शिमला के मुकाबले बाहरी क्षेत्रों के होटलों में एडवांस बुकिंग अधिक हो रही है।शहर के होटलों में अब तक 30 से 40 फीसदी कमरे ही बुक हुए हैं, जबकि कुफरी, नारकंडा, मशोबरा के होटलों में 70 से 80 फीसदी कमरे बुक हो चुके हैं।

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विंटर टूरिस्ट सीजन के दौरान बर्फबारी देखने की चाह में भी सैलानी शिमला शहर के स्थान पर कुफरी और नारकंडा के होटलों तथा होम स्टे में कमरे बुक करवा रहे हैं।कुफरी के होटल रेडिसन और न्यू कुफरी गलू के होटल स्टर्लिंग रिजॉर्ट सहित अन्य होटलों में क्रिसमस तथा न्यू ईयर के लिए 70 से 80 फीसदी तक एडवांस बुकिंग हो चुकी है। शिमला होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रिंस कुकरेजा ने बताया कि क्रिसमस और न्यू ईयर के लिए अभी 30 फीसदी तक एडवांस बुकिंग हुई है।
 
15 दिसंबर के बाद बुकिंग में तेजी आने की उम्मीद है।
शिमला ट्रेवल एजेंट्स एसोसियेशन के अध्यक्ष नवीन पॉल का कहना है कि सैलानी शहर के मुकाबले बाहरी क्षेत्रों में ठहरने को प्राथमिकता दे रहे हैं।क्रिसमस और न्यू ईयर के लिए कुफरी, नारकंडा, मशोबरा में शिमला से अधिक कमरों की बुकिंग हो रही है। शिमला में पार्किंग की किल्लत से टूरिस्टों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है, जबकि बाहरी क्षेत्रों में होटलों में ही पार्किंग मिल जाती है।
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शिमला में ट्रैफिक जाम और पार्किंग किल्लत बड़ी समस्या
शिमला शहर में सैलानियों को ट्रैफिक जाम और पार्किंग की किल्लत से जूझना पड़ता है। हर साल क्रिसमस और न्यू ईयर पर सैलानियों की आमद बढ़ते ही शोघी से शिमला तक सड़कें जाम हो जाती हैं। टूटीकंडी क्रासिंग से लिफ्ट तक पहुंचने में दो से ढाई घंटे लग जाते हैं। पार्किंग न मिलने पर टूरिस्टों को सड़क किनारे ही गाड़ियां खड़ी करनी पड़ती हैं, जबकि मशोबरा, कुफरी और नारकंडा के लिए टूटीकंडी क्रासिंग से बाईपास होते वाहन सीधे ढली पहुंच जाते हैं।

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