अब पुलिस को जुन्गा एसएफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार
दीपक मेहता
शिमला। राजधानी के यूको बैंक में नकली सोना गिरवी रखने के लाखों रुपये के धोखाधड़ी मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोपियों ने नकली सोना बैंक में गिरवी रखकर 55,45,500 रुपये के 8 गोल्ड लोन लिए थे।
जांच में सामने आया है कि सोने के आभूषणों का मूल्य बैंक के सूचीबद्ध जौहरियों ने आंका था। यह ऋण खाता जब गैर-निष्पादन खाता (एनपीए) बना और उधारकर्ता को जारी किए नोटिस का कोई परिणाम नहीं निकला तो ऋण राशि वसूलने के लिए सोने के आभूषणों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई। इस बीच दो ज्वेलरों ने बैंक को सूचित किया कि गिरवी रखे सोने का सही मूल्य उसे काटने के बाद ही दे सकते हैं। हालांकि जब सोने को काटा गया और जांच की तो यह नकली निकला। अब पुलिस को एसएफएसएल (स्टेट फोरेंसिक साइंस लैब) जुन्गा से सोने के आभूषणों की रिपोर्ट आने का इंतजार है।
15 जनवरी 2025 को धोखाधड़ी का यह मामला मालरोड स्थित यूको बैंक (मुख्य शाखा) का है। वरिष्ठ प्रबंधक गुरप्रीत सिंह ने सदर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी कि कुछ उधारकर्ताओं ने सोना खरीदने के नाम पर बैंक से 55,45,500 रुपये का ऋण लेकर बैंक के साथ ठगी की है। इसके बाद पुलिस ने वासुदेव पाठक, बसंत लाल, विकास कुमार, अंकिता और चंदर दास (आवेदन) को नामजद कर मामला पंजीकृत किया था। पुलिस ने चंदर दास (आवेदन) को 16 फरवरी को जांच में शामिल किया। जांच के दौरान चंदर सिंह ने खुलासा किया कि उसने सोने के आभूषण गिरवी नहीं रखे हैं, बल्कि बसंत लाल ने सोना गिरवी रखा था, उसने ऋण के लिए फॉर्म भरा था और उसके बचत खाते में 10,000 रुपये स्थानांतरित किए थे। बताया था कि ऋण की राशि बाद में वितरित की जाएगी। नौ महीने बाद उसके ऋण खाते में कोई पैसा नहीं दिखा और इसके बजाय उसे एक नोटिस मिला तो उसने बैंक से संपर्क कर प्रबंधक को सूचित किया कि उसे कोई ऋण राशि नहीं दी थी। संवाद
असली होने की फर्जी रिपोर्ट देने वाले भी नपेंगे
जिला अदालत ने धोखाधड़ी के इस मामले में सुन्नी निवासी चंदर दास की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा ने याचिकाकर्ता चंदर दास को जमानत पर रिहा करने से इनकार किया है। दलील दी कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर उधारकर्ता ने बड़े आपराधिक षड्यंत्र के हिस्से के रूप में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर बेईमानी से स्वर्ण ऋण प्राप्त किया। इस स्थिति में मामले की जांच के लिए गोल्ड लोन लेनदेन में शामिल अन्य आरोपियों से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। पुलिस यह भी तहकीकात कर रही है कि नकली सोने के असली होने की फर्जी रिपोर्ट किस आधार पर दी थी। इसके चलते अन्य आरोपियों ने पूरी धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।