हर घर में दीवाली के पर्व की धूम है। रोशनी के इस उत्सव पर अगर लोग ये सावधानी भी बरतें तो आपकी दिवाली खुशहाल बन सकती है।
क्या बरतें सावधानियां?
--बड़ों की देखरेख में ही पटाखों का मजा लें
--घरों के स्थान पर बाहर खुले में दीवाली मनाएं
--पुराने शहर में खास सावधानी बरतने की जरूरत
--पार्किंग स्थल या वाहनों के पास बम न फोड़े
--अस्पतालों से दूरी बना कर ही पटाखे चलाएं
क्या न करें?
--पटाखों को सड़क पर या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं जलाएं
--पटाखों को हाथ में पकड़ कर न जलाएं। उन्हें जमीन पर रखकर जलाएं और तुरंत उनसे दूर हो जाएं।
--जलाने के बाद पटाखा न जले तो तुरंत यह देखने की कोशिश न करे कि वह क्यों नहीं जला बल्कि उसके ऊपर पानी डाल दें।
--पटाखों के भंडार को पटाखे जलाने के स्थान के पास न रखें।
--छोटे बच्चों को स्वयं पटाखे जलाने को न दें। उनके साथ किसी बड़े को अवश्य रहना चाहिए।
--पटाखों को कभी भी जेब में न रखें।
--पटाखों पर झुककर उन्हें नहीं चलाना चाहिए। डिब्बे या कांच की बोतल में रख कर न जलाएं।
--अनार को हाथ में पकड़कर न जलाएं।
--दीपावली वाले दिन ढीले वस्त्र न पहनें और जलते पटाखे किसी अन्य व्यक्ति पर न फेंके।
क्या करें?
--दो या तीन व्यक्ति मिलकर पटाखे चलाएं ताकि दुर्घटना की स्थिति में दूसरे की मदद की जा सके।
--मोमबत्ती या अगरबत्ती द्वारा ही पटाखों को उचित दूरी रखकर जलाएं।
--पानी की 2-3 बाल्टियों को पटाखे जलाने के स्थान के पास रखें।
--दीपावली वाले दिन सिंथेटिक वस्त्र न पहनकर केवल सूती वस्त्र ही पहनें।
--राकेट को किसी पेड़ के नीचे या किसी अवरोध के पास न जलाकर खुली जगह पर ही जलाना चाहिए।
क्या करें चोट लगने पर?
--चोट लगने पर प्राकृतिक रूप से पलकें स्वयं बंद हो जाती है। इन्हें बंद ही रहने दें।
--पलकों को मलें बिल्कुल नहीं।
--जलन, दर्द और छटपटाहट होने पर घबराएं नहीं। दर्द निवारण के लिए दर्द निवारक टैब्लेट ले सकते हैं।
--आंखों को धोएं नहीं। अपनी या किसी दूसरे की सलाह पर नेत्रों में दवा डालने का प्रयास बिल्कुल न करे।
चोट लगी आंख में मलहम का उपयोग वर्जित है। नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें