हिमाचल के अब तक के सबसे बड़े जानलेवा हादसे
- 24 जुलाई 2026 को कुल्लू से पांगी जा रही एक टैक्सी पहाड़ी दरकने से मलबे की चपेट में आ गई, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई।
- 18 जून 2026 को चंबा के मसरूंड में करीब 500 मीटर गहरी खाई में बोलेरो गाड़ी गिरने से सात लोगों की जान चली गई।
- 11 मई 2026 को ककीरा (चंबा-नूरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग) में पर्यटकों से भरी इनोवा दुर्घटनाग्रस्त होने से छह लोगों की मौत हुई।
- 4 मई 2026 को सिरमौर में कार खाई में गिरने से चार लोगों की जान गई।
- 9 जनवरी 2026 को सिरमौर के शिलाई-कुपवी मार्ग पर निजी बस 500 मीटर गहरी खाई में गिरने से 13 लोगों की मौत हुई थी।
- 20 जून 2024 को शिमला जिले के जुब्बल स्थित चोरी कैंची में एचआरटीसी बस पलटने से चार लोगों की मौत हुई थी।
- 20 जून 2017 को शिमला के नेरवा में एचआरटीसी बस हादसे में 44 यात्रियों की जान गई थी।
- 13 अगस्त 2013 को चंबा के चुवाड़ी में निजी बस दुर्घटना में 41 लोगों की मौत हुई थी।
- 3 अक्तूबर 2012 को मंडी के जोगिंद्रनगर में बस खाई में गिरने से 46 लोगों की मौत हुई।
- 5 नवंबर 2012 को किन्नौर के टापरी के पास बस के सतलुज नदी में समा जाने से 42 लोगों की जान चली गई।
- 2 जनवरी 2010 को बिलासपुर में निजी बस हादसे में 31 लोगों की जान गई थी।
चांजू बस दुर्घटना की होगी मैजिस्ट्रेट जांच, एडीएम चंबा ने दिए निर्देश
चांजू में हुए बस हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी किए गए हैं। एडीएम चंबा अमित मेहरा ने हादसे के कारणों और परिस्थितियों की जांच के लिए संबंधित एसडीएम चुराह को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। मजिस्ट्रेट जांच के दौरान हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। इसमें दुर्घटना के संभावित कारणों, परिस्थितियों और संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई जाएगी। अधिकारियों को जांच प्रक्रिया पूरी गंभीरता और समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से हादसे में प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता मुहैया करवाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। तहसीलदार चुराह को निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व विभाग के कर्मचारी प्रभावित परिवारों से संपर्क कर उन्हें नियमानुसार मिलने वाली राहत राशि घरद्वार जाकर उपलब्ध करवाएं। जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट निर्धारित अवधि में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिससे हादसे के कारणों का पता लगाकर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।