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मैक्लोडगंज: चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ गरजीं तिब्बती महिलाएं

Sat, 12 Mar 2022 05:52 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला

सार

केंद्रीय तिब्बत महिला संगठन की उपाध्यक्ष शेरिंग डोलमा ने कहा कि चीन तिब्बतियों के खिलाफ तानाशाही नीतियों को अपनाए हुए है। चीन की ओर से तिब्बत में आम जनता पर अत्याचार के साथ तिब्बत की सांस्कृतिक धरोहरों को तोड़ा गया।
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चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करतीं तिब्बती महिलाएं। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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चीन की ओर से बीते 63 सालों से तिब्बतियों पर किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ शनिवार को तिब्बत राष्ट्रीय विद्रोह की 63वीं वर्षगांठ पर तिब्बती महिला संगठनों ने मैक्लाडगंज से लेकर धर्मशाला स्थित कचहरी अड्डा तक रैली निकाली। चीन की तिब्बत विरोधी नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया गया। केंद्रीय तिब्बत महिला संगठन की उपाध्यक्ष शेरिंग डोलमा ने कहा कि वर्ष 1959 में समय बहुत खराब हो गया था। तब से लेकर चीन देश तिब्बत की जनता को अपने अत्याचार का शिकार कर रहा है। 

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200 तिब्बती प्रदर्शनकारी कर चुके हैं आत्मदाह 
डोलमा ने बताया कि चीन तिब्बतियों के खिलाफ तानाशाही नीतियों को अपनाए हुए है। चीन की ओर से तिब्बत में आम जनता पर अत्याचार के साथ तिब्बत की सांस्कृतिक धरोहरों को तोड़ा गया। अब तक लगभग 200 तिब्बतियों ने तिब्बत के भीतर विद्रोह स्वरूप आत्मदाह कर लिया है। वहीं विद्रोह के दौरान अभी भी कई तिब्बती लोग लापता हैं।

तिब्बत के सभी लोगों की मांग तिब्बत की आजादी और धर्मगुरु दलाईलामा की तिब्बत में वापसी की रही है। इस समय जो हालात तिब्बत में हैं, तिब्बत उससे असंतुष्ट है। अब समय आ गया है कि चीन को हर हालत में तिब्बत देश को आजाद करना ही होगा। उन्होंने कहा कि अहिंसक प्रदर्शनों को चीनी सैनिकों व पुलिस दलों के आधुनिक हथियारों से कुचला गया है। इस दौरान सैकड़ों महिलाएं व बच्चे प्रदर्शन में मौजूद रहे।

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