कुछ दिन पहले दलाईलामा को प्रोस्टेट ग्लैंड कैंसर की खबरें सामने आई थीं। उसके बाद उनके अनुयायी काफी चिंतित हो गए थे। दलाईलामा ने जीवन में खुश रहने के टिप्स दिए।
कहा कि दूसरों को खुशी देने में जो आनंद है, वह किसी और में नहीं। धर्मगुुरु ने इस दौरान अपनी जिंदगी के अनुभवों को भी बांटा। उन्होंने 16 साल की उम्र में तिब्बतियों के दलाईलामा के तौर पर जिम्मा संभालने से लेकर तिब्बत छोड़ने के सभी अनुभवों को साझा किया।
उन्होंने कहा कि 24 साल की उम्र में तिब्बत छोड़कर नेपाल के रास्ते से भारत आना तथा यहां आकर भारत को अपना दूसरा घर बनाना, सभी निर्णय बिल्कुल सही थे।
धर्मगुरु ने कहा कि आज जब भी वह अपने अतीत को याद करते हैं तो उन्हें उस दौरान लिए गए निर्णयों को लेकर कोई गिला-शिकवा नहीं, बल्कि गर्व महसूस होता है। आज वह अपने आपको काफी स्वतंत्र महसूस करते हैं।