पिछले कुछ सालों से चंद्रताल झील पहुंचने वाले पर्यटक वाहनों की तादाद दोगुना हो गई है। चंद्रताल में स्थापित अस्थायी पुलिस चौकी के रिकॉर्ड के मुताबिक रोजाना 100 से अधिक पर्यटक वाहन यहां पहुंच रहे हैं।
सैलानियों की सुविधा के लिए झील से महज ढाई किमी दूर लगभग 200 टेंट हैं। पर्यटक वाहनों के लिए चंद्रताल झील से महज आधा किमी दूर ही पार्किंग है।
इससे चंद्रभागा रेंज का तापमान बढ़ रहा है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण कम बर्फबारी होना भी झील सिकुड़ने का कारण है।
स्पीति वाइल्ड लाइफ के रेंज अधिकारी देविंद्र चौहान ने भी माना कि बीते सालों के मुकाबले इस बार झील का आकार कम हुआ है। साल 2005 में राष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड घोषित क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है।
जीबी पंत राष्ट्रीय पर्यावरण एवं शोध संस्थान मौहल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल का कहना है कि झील के आस-पास इतने व्यापक स्तर पर मानवीय गतिविधियों के बढ़ने और पर्यटक वाहनों के पहुंचने से ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज होना स्वाभाविक है।
सर्दियों में गिरने वाली बर्फ का पानी झील तक पहुंचता है। लेकिन चोटियों पर जमी यह बर्फ वक्त से पहले ही पिघल रही है। इससे चंद्रताल झील का दायरा सिकुड़ता जा रहा है।