14वें तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर चिंता जताई। कहा कि आज की भौतिकवादी शिक्षा प्रणाली सही नहीं है। इससे जिंदगी जीने का तरीका भी भौतिकवादी होता जा रहा है।
प्राचीन भारत की परंपरा पर आधारित सार्वभौमिक आचार विचार की प्रणाली को वर्तमान शिक्षा पद्धति में शामिल किया जाना चाहिए। मैकलोडगंज स्थित अपने निवास स्थल पर वियतनाम से आए 80 सदस्यीय दल के साथ संवाद में धर्मगुरु ने यह बात कही।
दलाईलामा ने वियतनाम के तीन शहरों के अनुयायियों से टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बात की। दलाईलामा ने कहा कि चीन के कड़े नियंत्रण में तिब्बतियन पीड़ा झेल रहे हैं। इसको लेकर तिब्बती भी चीन की तरफ नकारात्मक भाव से देखें, ऐसा सोचने के लिए तिब्बतियों को कभी प्रोत्साहित नहीं किया।
चीनी लोग भी हमारे भाई और बहन हैं। दलाईलामा ने कहा कि आज की भागदौड़ और भौतिकवादी जिंदगी में हर इंसान सिर्फ अपने तक सीमित होकर रह गया है। इसके लिए वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी बड़ी जिम्मेदार है।
आज शिक्षण संस्थानों को चाहिए कि वे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें शारीरिक और आंतरिक तौर पर कल्याणकारी बनने के लिए प्रेरित करें। दलाईलामा ने ‘रिएलिटी ऑफ टूडेज वर्ल्ड’ विषय पर कहा कि विश्व में गरीब और उनके बच्चे लगातार आम जरूरतों की कमी के कारण मर रहे हैं। भाग दौड़ भरी जिंदगी में अमीर लोग भी खुशी और शांतिपूर्वक जीवन नहीं जी पा रहे हैं।