पहले गले के कैंसर होने पर मुंह से लेकर गले तक का पूरा भाग निकाल लिया जाता था।
टांडा मेडिकल कॉलेज गले के कैंसर का सफल इलाज करने वाला प्रदेश का पहला मेडिकल कॉलेज होगा। कैंसर की होने वाली सर्जरी में गले से निकाले जाने वाला पूरा भाग दोबारा से इंप्लांट हो सकेगा। मरीज के लिए विशेष यह होगा कि गले के भाग को इंप्लांट करने के बाद वह पहले की तरह ही काम कर सकेगा। वह दूसरे व्यक्ति पर आत्मनिर्भर नहीं होगा। इससे पहले ऑपरेशन के बाद मरीज के गले का कैंसर वाला भाग निकाल लिया जाता था।
इससे मरीज न तो सुन पाता था और न ही बोल पाता था। इतना ही नहीं, वह खाना भी नहीं खा पाता था। अब नई पद्धति से ऑपरेशन कर इंप्लांट करने पर मरीज अपने आप को असाधारण महसूस नहीं करेगा। पहले गले के कैंसर होने पर मुंह से लेकर गले तक का पूरा भाग निकाल लिया जाता था। मरीज सांस भी आराम से नहीं ले पाता था।