प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरों वाली टी-शर्ट पहनी थीं, जिन पर सरकार और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लिखे थे। कुछ ने शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया, जिससे विवाद हुआ। बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस की टीम ने शिमला जिले के चिड़गांव में एक होटल से तीनों को गिरफ्तार किया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने दिल्ली पुलिस पर अपहरण का केस दर्ज कर उनके वाहनों को शोघी में रोक लिया। दोनों पुलिस बलों के बीच लंबे समय तक तनावपूर्ण गतिरोध रहा, जिसमें हिमाचल पुलिस ने दिल्ली टीम को कई बार रोका और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वीरवार सुबह छह बजे शोघी से दिल्ली पुलिस टीम आरोपियों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हुई।
तीनों का अंबाला में कराया गया मेडिकल
दिल्ली पुलिस वीरवार सुबह 8:30 बजे तीनों को लेकर अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल पहुंची। यहां पर पुलिस ने उनका मेडिकल कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कार्यकर्ताओं को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर जा रहे हैं। हिमाचल में हंगामा होने पर उन्होंने तीनों का अंबाला में मेडिकल कराने का निर्णय लिया।
कथित अपहरण की शिकायत पर की गई कानूनी कार्रवाई : डीजीपी
चिड़गांव थाने को मिली कथित अपहरण की शिकायत पर हिमाचल पुलिस ने त्वरित कानूनी कार्रवाई की। हिमाचल और दिल्ली पुलिस में बुधवार को हुए टकराव के एक दिन बाद प्रदेश पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने स्पष्टीकरण जारी किया है। डीजीपी अशोक तिवारी की ओर से कहा गया है कि सूचना मिली थी कि बाहरी राज्यों की गाड़ियों में सादे कपड़े पहनकर आए कुछ अज्ञात लोग हाेटल से तीन व्यक्तियों और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान (डीपीआर) को जबरन अपने साथ ले गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिमला पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी की और सोलन पुलिस के साथ समन्वय बनाकर शोघी, आईएसबीटी शिमला व धर्मपुर में संदिग्ध वाहनों को रोका और उन्हें हिरासत में लिया।
हालांकि, शिमला पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद स्पष्ट हुआ कि यह कोई अपहरण नहीं, बल्कि दिल्ली और हरियाणा पुलिस की एक संयुक्त छापेमारी थी। पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि सादे कपड़े पहनकर आए ये लोग दिल्ली और हरियाणा पुलिस के कर्मचारी थे। ये कर्मचारी दिल्ली में दर्ज एक आपराधिक मामले में इन तीन व्यक्तियों का पीछा करते हुए उन्हें हिरासत में लेने आए थे। शिमला पुलिस ने रिपन अस्पताल में मेडिकल परीक्षण करवाने के बाद तीनों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया। अदालत ने 18 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की, जिसके बाद उन्हें दिल्ली जाने की अनुमति दी। घटना में संबंधित होटल मालिक संदीप रंजन की शिकायत पर दिल्ली और हरियाणा पुलिस के खिलाफ चिड़गांव थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
खुफिया एजेंसियों की चूक पर तल्ख हुई सरकार, मुख्य सचिव ने डीजीपी से की लंबी चर्चा
खुफिया एजेंसियों की चूक पर राज्य सरकार ने तल्खी दिखाई है। मुख्य सचिव ने राज्य पुलिस महानिदेशक से इस विषय पर लंबी चर्चा की है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच दो दिनों तक दिल्ली और पंजाब पुलिस यहां पर रुकती है और इसकी गुप्तचर एजेंसियों को भनक तक नहीं लगती। जिला शिमला पुलिस को इसकी सूचना न मिलती तो राज्य सरकार को इस कार्रवाई की कानोंकान सूचना नहीं मिलती। हालांकि, शिमला पुलिस की तत्काल कार्रवाई पर पुलिस अधीक्षक शिमला गौरव सिंह की भी सरकार ने पीठ थपथपाई है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी इस पूरे मामले पर मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट तलब की है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता की अध्यक्षता में गुरुवार को राज्य पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी व अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ दिल्ली व हिमाचल पुलिस में टकराव के मामले में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने पुलिस की कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की। इस अवसर पर इस पर चिंता जाहिर की गई कि दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस दो दिन यहां रही और रोहड़ू तक पहुंच गई। वहां से तीनों युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी उठाकर ले गई। हालांकि, शिमला पुलिस को इसकी सूचना मिली तो उन्हें शोघी में नाका लगाकर रोक लिया गया। ऐसे में राज्य गुप्तचर विभाग यानी सीआईडी और पुलिस के इंटेलिजेंस विंग को इसका क्यों पता नहीं लगा। यह उल्लेखनीय है कि खुफिया तंत्र की यह सुस्ती 2024 में उस समय भी सामने आ चुकी है, जब केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां कांग्रेस के छह विधायकों को विधानसभा परिसर से अपने साथ ले गई थीं। उस समय सीआईडी के शीर्ष अधिकारियों पर इस लापरवाही की गाज गिरी थी। वर्तमान प्रकरण में भी गुप्तचर एजेंसियों की ढील पर राज्य सरकार कार्रवाई कर सकती है।
हिमाचल पुलिस ने नियमानुसार की कार्रवाई : चौहान
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान ने कहा कि दिल्ली पुलिस को रोकने की हिमाचल पुलिस ने कार्रवाई नियमानुसार की है। उन्होंने कहा कि उन्हें हैरानी है कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को किसी अधिवक्ता से बात करके सही जानकारी लेनी चाहिए थी, मगर वह दिल्ली पुलिस के समर्थन में खड़े हो गए। कानून यह है कि दूसरे राज्यों में गिरफ्तारी करने जाने पर वहां की स्थानीय पुलिस को सूचना देनी होती है। यह 75 लाख लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला भी है। पुलिस ने इस कार्रवाई से पूरे देश को एक संदेश दिया है। चौहान ने कहा कि दिल्ली और हरियाणा पुलिस के भी कुछ लोग बिना वर्दी के हिमाचल प्रदेश में आए। रोहड़ू में उन्होंने जो कार्रवाई की और जिन तीन लोगों को उठाकर ले गए। उसे प्रदेश पुलिस ने गैर कानूनी माना। जिस प्रकार इसके लिए प्रोटोकॉल और नियम तय है। उन्होंने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने संदीप कुमार बनाम दिल्ली सरकार को सख्त हिदायत दी थी कि दूसरे राज्यों में जाकर गिरफ्तारी करने का पूरा प्रोटोकॉल है। दिल्ली पुलिस को इसके लिए डांट पड़ी है। प्रदेश पुलिस भी चिट्टा, दूसरे नशे आदि अपराधों को लेकर बहुत से लोगों को दूसरे राज्यों से गिरफ्तार कर ला रही है। पंजाब और दूसरे राज्यों से बड़े-बड़े अपराधियों को गिरफ्तार करके लाया जाता है तो उसके लिए स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाता है। इस तरह का कानून न तो हिमाचल पुलिस खुद तोड़ती है और न ही दिल्ली पुलिस से इस तरह की उम्मीद की जाती है।
बिना वर्दी व वारंट के हिमाचल से लोगों को उठाने से रोकना राज्य का दायित्व : नेगी
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने नाहन में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि हिमाचल पुलिस ने बीते दिन कार्रवाई किसी को खुश करने के लिए नहीं की है। यह कार्रवाई कानून के हिसाब से की गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गुंडागर्दी नहीं चलने दी जाएगी। नेगी ने कहा कि बाहर से कई लोग बिना किसी वर्दी व वारंट के हिमाचल में पहुंचते हैं और यहां से लोगों को उठाकर ले जाएंगे। ऐसे मामलों में राज्य का दायित्व है कि उनकी गुंडागर्दी को रोका जाए। इसी के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि जयराम कुछ भी बोलते हैं। राहुल गांधी को खुश करने के लिए यह कार्रवाई नहीं की गई है। संविधान व कानून के हिसाब से राज्य ने कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी दूसरे राज्य की पुलिस को बाहरी राज्य में जाकर गिरफ्तारी करनी है तो इसके लिए नियम तय हैं। इसके लिए पुलिस के पास वारंट होना चाहिए, वर्दी में होने चाहिए और स्थानीय पुलिस को जानकारी दी जानी चाहिए। ऐसे तो कोई भी यहां से लोगों को उठाकर ले जाएगा। वहीं, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राजीव बिंदल के बयान पर भी नेगी ने पलटवार करते हुए कहा कि बिंदल खुद अपने घरों में देखेें, अपराधी उनके घरों में बैठें हैं।