इस खबर को सुनकर उनके पिता और माता ने सुशील के आने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुशील की पत्नी भी खुशी से फूली नहीं समा रही। माता ने बताया कि वह अपने बेटे के लिए उसके मनपसंद पकवान तैयार कर रही हैं। रविवार सुबह बेटे के घर पहुंचने की खबर ने उन्हें जैसे संजीवनी ही दे दी।
सुशील के पिता रघुवीर ने फिर से एक बार उनके बेटे और उसके सहयोगियों को छुड़वाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, सांसद शांता कुमार और राज्य सरकार के सहयोग का आभार जताया। उन्होंने समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ का विशेष रूप से धन्यवाद किया कि उन्होंने उनकी हर पीड़ा को सरकार व जनता तक पहुंचाया।
समुद्री लुटेरों ने 12 मार्च को सेटेलाइट फोन से सुशील के परिवार वालों को कॉल कर तीनों युवकों के अपहरण की सूचना दी थी। उन्हें छोड़ने के एवज में 11 मिलियन नायरा करेंसी के रूप में फिरौती मांगी थी।
इससे पहले सुशील की 31 जनवरी को परिवार वालों से बातचीत हुई थी। समुद्री लुटेरों ने 24 मार्च को फिर सुशील के परिवार वालों को फोन कर फिरौती न देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी। लुटेरों ने 26 मार्च तक फिरौती देने का अल्टीमेटम दिया था।