प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कौशल विकास भत्ता योजना में नया पेंच फंस गया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के हजारों बेरोजगारों को मिलने वाला भत्ता अब नहीं मिलेगा।
नए नियमों के तहत नए सिरे से हलफनामा जमा न करने वाले बेरोजगार युवाओं का भत्ता रोजगार विभाग ने रोक दिया है। इस वजह से प्रदेश के हजारों युवाओं का भत्ता लटक गया है।
प्रदेश सरकार की कौशल विकास भत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इसकी पेचिदा औपचारिकताओं के कारण पहले ही कई युवा इसके लिए पात्रता ही नहीं पूरी कर पाए।
प्रदेश में 70 हजार युवा पंजीकृत
इस माह एफिडेविट जमा करने वालों को ही भत्ते की रकम जारी की गई है। राज्य में यह संख्या हजारों में बताई जा रही है। अकेले बिलासपुर में ही 3000 से अधिक युवाओं का भत्ता रोका गया है।
सत्ता में आते ही प्रदेश कांग्रेस सरकार ने कौशल विकास भत्ता योजना शुरू की। इसके तहत कौशल विकास के लिए बेरोजगार युवाओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह भत्ता दिया जा रहा है। प्रदेश में कौशल विकास भत्ते के तहत 70 हजार से अधिक युवाओं ने पंजीकरण करवाया है।
बिलासपुर जिले में यह संख्या 3822 है। विभिन्न औपचारिकताओं के साथ उनसे हलफनामे मांगे गए थे। विभाग ने एफिडेविट को हर वर्ष जमा करवाना अनिवार्य किया है। इस वर्ष भी अभी तक कई युवाओं ने हलफनामे जमा नहीं करवाए।
फरवरी-मार्च का भत्ता गायब
कौशल विकास भत्ते के पात्र युवाओं का फरवरी और मार्च महीने का भत्ता गायब हो गया है। बैंक प्रबंधन और रोजगार विभाग में आपसी तालमेल न होने से युवाओं को दो माह का भत्ता नहीं मिला।
बैंक प्रबंधन का कहना है कि रोजगार विभाग से जो लिस्ट आई है, उसमें कई खामियां हैं। कई बैंक का नाम पूरा लिखा गया है तो कहीं सिर्फ शॉट फार्म में।
यहां तक कि कई पात्र युवाओं की राशि का तक जिक्र नहीं है। इस वजह से साफ्टवेयर इसे नहीं उठा रहा। वहीं, रोजगार विभाग का कहना है कि लिस्ट के साथ राशि भी जारी कर दी गई है। भत्ता जल्द मिल जाएगा।
क्या देना होगा हलफनामे में लिखकर
भत्ते के पात्र युवाओं को यह स्वयं लिखकर देना होगा कि वह सरकारी, गैर सरकारी नौकरी में नहीं है। इसमें शिक्षा, हिमाचली बोनोफाइड का भी जिक्र करना होगा।
जबकि परिवार की वार्षिक आय 2 लाख से अधिक नहीं होने के बारे में भी लिखकर देना होगा। किस संस्थान में कौशल विकास की ट्रेनिंग ले रहे हैं,उसका भी एफिडेविट में जिक्र करना अनिवार्य है।
उपनिदेशक रोजगार केके शर्मा ने कहा कि विभाग के पास खर्च करने को 100 करोड़ रुपये हैं। हो सकता है कि उन युवाओं का भत्ता रुका हो, जिन्होंने नए सिरे से एफिडेविट नहीं दिए हों।