प्रदेश में कई ऐसे स्थान हैं। जहां पर ट्रैकिंग पर निकले विदेशी मेहमान गुम हो जाते हैं। कई महीनों और कई बार तो सालों के बाद शवों के अवशेष मिलते हैं। इन अवशेषों की पहचान करना फोरेंसिक विभाग के लिए भी मुश्किल हो जाता है। मशीन स्थापित होने के कारण फोरेंसिक विभाग को काफी सहूलियत मिलेगी।
प्रदेश में जल्द ही नैक्सट जनरेशन सिक्वेंसी (एनजीएस) मशीन स्थापित होगी। मशीन की मदद से गले सड़े शवों की पहचान करना आसान हो जाएगी। मशीन यह भी बता देगी कि शव किस देश से संबंधित है और इसका रंग और रूप कैसा है। इसके लिए बजट भी आ गया है और टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। - डॉ. अरुण शर्मा, निदेशक, राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला।