हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में लिए जाने वाला किराया फिर चर्चा में आ गया है। बसों में एक समान दूरी पर आने-जाने के लिए अलग-अलग डिपो की बस में अलग-अलग किराया देना पड़ रहा है। ऐसे में तीन से पांच रुपये का टिकट में अंतर आ रहा है। इस समस्या को कई बार यात्री पथ परिवहन निगम को बता चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा है। स्थानीय रूट पर ही नहीं बल्कि लांग रूट पर भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। लोगों को एक समान दूरी के लिए अलग किराया देने के लिए मजबूर हो रहे हैं। किराये में विभिन्नता के कारण कई बार यात्रियों की बहस भी हो रही है। वहीं लोगों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि असल में कितना किराया है। निगम दावा कर रहा है कि मशीनों में निर्धारित किलोमीटर के मुताबिक ही किराये की गणना स्वयं होती है। गौरतलब है कि प्रदेश समेत बाहरी राज्यों को जाने के लिए पथ परिवहन की अलग-अलग डिपो की बसें लगी हैं। इन बसों में यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए निगम की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन एचआरटीसी में किराये को लेकर बार-बार चर्चाएं हो रही है। हाल ही में निगम की बसों में सामान भेजने के निर्धारित किराये को लेकर सोशल मीडिया में एक पोस्ट वायरल हुई थी। इसके बाद निगम ने मामले में संज्ञान लिया था और मामला शांत करवाया था। लेकिन इन दिनों बसों का विभिन्न किराया लोगों से वसूला जा रहा है। इससे यात्री काफी परेशान होते हैं।
केस स्टडी-एक
पथ परिवहन निगम की धर्मपुर से मनीमाजरा बस में एक यात्री ने सफर किया। उसका आने और जाने का किराया अलग वसूला गया। हालांकि जाने के लिए तारादेवी यूनिट-1 की बस थी। आने के लिए रुरल यूनिट-3 की बस थी। ऐसे में जाने के लिए यात्री ने 85 रुपये किराये पर स्मार्ट कार्ड का प्रयोग कर 77 रुपये किराया दिया। जबकि आने के लिए 82 रुपये पर स्मार्ट कार्ड का प्रयोग कर 73 रुपये किराये का भुगतान किया।
केस स्टडी-दो
स्थानीय रूट पर भी अलग-अलग डिपो की बस में किराया अलग-अलग है। सोलन से धर्मपुर के लिए भी किराये में काफी अंतर आ रहा है। किसी बस में किराया 37 रुपये है तो किसी बस में 38 और 39 रुपये किराया वसूला जाता है। हैरत की बात तो यह है कि एक समान दूरी का अलग-अलग किराया कैसे हो सकता है। इसकी जांच की जानी चाहिए।
मामला संज्ञान में है। कई बसों में किलोमीटर में फर्क आ रहा है। इसे ठीक करवाने का काम किया जा रहा है। जल्द ही समस्या का स्थायी समाधान भी हो जाएगा। इसके लिए कार्य किया जा रहा है।-रोहन चंद ठाकुर, एमडी, परिवहन निगम, शिमला।