निर्माण के लिए चार कंपनियों आईं आगे, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने मंजूरी के लिए चंडीगढ़ भेजा प्रस्ताव
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शहरवासियों को यातायात जाम से मिलेगी निजात अमर उजाला ब्यूरो शिमला। तीन सालों से अधर में लटके महत्वाकांक्षी खलीनी फ्लाईओवर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पांचवीं बार आमंत्रित किए टेंडर में चार कंपनियां इसके निर्माण के लिए आगे आईं हैं।
अब विभाग के अधिशासी अभियंता शिमला के कार्यालय ने मामले को मंजूरी के लिए अतिरिक्त निदेशक जनरल चंडीगढ़ कार्यालय को भेज दिया है। यहां से स्वीकृति मिलते ही प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया जाएगा। विभागीय कार्रवाई में लंबा समय नहीं लगा तो आने वाले एक से दो सालों में यह प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो जाएगा। फ्लाईओवर का प्रस्तावित डिजाइन 5.8 मीटर चौड़ा और 210 मीटर लंबा सिंगल लेन स्ट्रक्चर है। इसमें आधुनिक स्टील पाइल्स तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।
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खलीनी फ्लाईओवर बनने से शहर के प्रमुख इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। वर्तमान में हजारों वाहन खलीनी चौक पर ट्रैफिक जाम में फंसते हैं। इससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसको देखते हुए स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शिमला को सुगम शहर बनाने के लिए इस योजना को प्रस्तावित किया था।
वर्ष 2024 में पूरा होना था काम
खलीनी में हर रोज लगने वाले ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2022 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। इसे वर्ष 2024 तक बनकर तैयार होना था लेकिन आज भी यह परियोजना कागजों में ही सिमटकर रह गई है। इस फ्लाईओवर के बनने से खलीनी चौक समेत बीसीएस, टुटीकंडी, पंथाघाटी और टॉलैंड में लगने वाले यातायात जाम से राहत मिलेगी। 17.5 करोड़ की लागत से बनने वाली इस परियोजना का पहली बार टेंडर 2021 में हुआ था और 19.5 करोड़ लागत रखी थी। इसके तहत 2 करोड़ की लागत से खलीनी चौक को चौड़ा किया था लेकिन परियोजना के डिजाइन में कमियां पाई गईं। बाद में इसे रद्द कर दिया था। वर्ष 2023 में दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन इस बार केवल एक ठेकेदार ही बोली में शामिल हुआ। तीसरी बार टेंडर जारी होने पर भी एक कंपनी को काम आवंटित कर दिया लेकिन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग चंडीगढ़ से निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली। चौथी बार भी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी न होने और प्रशासनिक मंजूरी के अभाव में यह प्रक्रिया अधूरी रह गई। अब पांचवीं बार चार कंपनियों के वित्तीय बोली में भाग लेने से उम्मीद है कि इस बार निर्माण की मंजूरी मिल जाएगी।