अग्निशमन विभाग के सर्वे में खुलासा, आग की घटनाएं होने पर झेलनी होगी परेशानी, प्रशासन को सौंपी रिपोर्ट
शहर में 664 हाइड्रेंट में से 538 ही कर रहे काम अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए लगाए हाइड्रेंट में से 126 अतिक्रमण और निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ गए हैं। अग्निशमन विभाग के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। 664 हाइड्रेंट में से 538 काम कर रहे हैं। चिंता की बात यह है कि आग की घटनाओं को लेकर अति संवेदनशील शिमला शहर में इस तरह की लापरवाही लोगों के जानमाल को खतरे में डाल सकती है। शहर में हर साल सैकड़ों आग की घटनाएं पेश आती हैं। आग बुझाने के लिए अग्निशमन विभाग के दमकल वाहन मौके पर पहुंचते हैं और वाटर हाइड्रेंट की मदद से पानी की आपूर्ति हासिल करते हैं लेकिन सड़क निर्माण, अतिक्रमण और अन्य निर्माण कार्यों के कारण शहर में आग बुझाने के लिए स्थापित किए हाइड्रेंट मिट्टी के नीचे दब गए हैं। इस वजह से आग की घटनाएं सामने आने पर इन पर काबू पाने में विभाग को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ेगा।
अग्निशमन विभाग ने इस संबंध में रिपोर्ट नगर निगम और प्रशासन को सौंपकर अतिरिक्त व्यवस्था करने की मांग की है। शहर में पहले ही तंग सड़कों और गलियों के कारण कई स्थानों पर अग्निशमन विभाग की दमकल टीमों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हाइड्रेंट की व्यवस्था नहीं होने पर भीषण आग की घटनाओं पर काबू पाने में और दिक्कतें पेश आ सकती हैं।
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छोटा शिमला में सबसे अधिक 84 हाइड्रेंट दबे
शिमला शहर में आग की घटनाओं से निपटने के लिए 664 हाइड्रेंट हैं। इसमें छोटा शिमला क्षेत्र में 314 हाइड्रेंट, मालरोड क्षेत्र में 218 और तिलकनगर क्षेत्र में 132 हाइड्रेंट स्थापित किए गए हैं। सर्वे में छोटा शिमला क्षेत्र में सबसे अधिक हाइड्रेंट अतिक्रमण और निर्माण कार्य समेत अन्य वजहों से दब गए हैं। छोटा शिमला में 314 में से 84 हाइड्रेंट दब गए हैं। मालरोड क्षेत्र में 25 हाइड्रेंट और तिलकनगर क्षेत्र में 13 हाइड्रेंट सर्वे में नहीं मिल रहे हैं।
त्योहारी सीजन में अधिक होती हैं आग की घटनाएं
शहर में त्योहारी सीजन में सबसे अधिक आग की घटनाएं सामने आती हैं। इसमें खासतौर पर दिवाली के आसपास मामले बढ़ जाते हैं। इसको देखते हुए अग्निशमन विभाग बरसात का मौसम खत्म होने के बाद शहर में लगे हाइड्रेंट का सर्वे करता है। इसमें हाइड्रेंट की जांच करके पता लगाया जाता है कि कहीं वह खराब तो नहीं है। इस सर्वे का मकसद आग की घटनाएं पेश आने पर जल्द से इस पर काबू पाना होता है, जिससे की जानमाल का कम से कम नुकसान हो सके। डिविजनल फायर ऑफिसर नीतिन धीमान ने बताया कि शहर में किए सर्वे में करीब 126 हाइड्रेंट नहीं मिले हैं। यह हाइड्रेंट निर्माण कार्यों या अन्य वजहों से दब गए हैं।